एआईएडीएमके के 3 विधायकों का इस्तीफा

  • सभी विधायक टीवीके पार्टी में हुए शामिल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। एआईएडीएमके को एक और झटका लगा है। आईएडीएमके के तीन विधायकों ने तमिलनाडु विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी में शामिल हो गए। विधायकों मरगथम कुमारवेल, जयकुमार और सत्यबामा ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। यह घटनाक्रम एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम के नेतृत्व में 30 विधायकों द्वारा विजय की टीवीके सरकार को समर्थन देने के दो सप्ताह बाद सामने आया है। एडप्पाडी पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली पार्टी से इस्तीफा देने वाले तीनों विधायक इसी बागी गुट का हिस्सा थे।
कुमारवेल ने मदुरंथकम निर्वाचन क्षेत्र से, सत्यबामा ने धारापुरम से और जयकुमार ने पेरुंदुरई से एआईएडीएमके के टिकट पर जीत हासिल की थी। धारापुरम और पेरुंदुरई पश्चिमी तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र में अन्नाद्रमुक के पारंपरिक गढ़ का हिस्सा हैं, जबकि मदुरंथकम चेन्नई के पास स्थित है। अपना इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद, विधायकों ने टीवीके मंत्री आधव अर्जुन से उनके कक्ष में मुलाकात की। ये तीनों विधायक उन 25 विधायकों में शामिल थे जिन्होंने हाल ही में विजय के प्रति अपनी निष्ठा बदल ली और 13 मई को हुए फ्लोर टेस्ट में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया। एआईएडीएमके के बागी विधायकों में से पांच ने पार्टी प्रमुख एडप्पाडी पलानीस्वामी के प्रति अपनी निष्ठा वापस लौटा ली है। इसके साथ ही विधानसभा में पलानीस्वामी का समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या बढक़र 27 हो गई है।

बंगाल में टीएमसी के 100 पार्षदों ने दिया त्याग पत्र

कभी शक्तिशाली रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस, बंगाल चुनावों में अपनी करारी हार के बाद कमजोर पड़ती नजर आ रही है। लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार जैसे वरिष्ठ नेता खुलकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं, वहीं तृणमूल नियंत्रित नगर निकायों में अशांति के चलते सामूहिक इस्तीफे हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में विभिन्न नगरपालिकाओं के लगभग 100 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। इस राजनीतिक उथल-पुथल ने भाजपा को उन नगर निकायों में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर दिया है जो काफी हद तक तृणमूल के नियंत्रण में हैं। संकट इतना गंभीर हो गया है कि अगले साल होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले ही कई नगर निगम बोर्डों को भंग किया जा सकता है।

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