सीतापुर: जर्जर छत बनी काल, मलबे में दबकर राजगीर की दर्दनाक मौत
सीतापुर के महोली क्षेत्र में जर्जर मकान की छत गिरने से राजगीर दीपेंद्र कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। मरम्मत कार्य के दौरान मलबे में दबने से हादसा हुआ। मृतक अपने पीछे पत्नी और चार छोटे बच्चों को छोड़ गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सीतापुर के महोली क्षेत्र में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। मजदूरी करने गए एक राजगीर की उस समय मौत हो गई, जब वह जर्जर मकान की छत की मरम्मत कर रहा था। अचानक भरभराकर गिरी छत के मलबे में दबने से उसकी मौके पर ही जान चली गई। हादसे के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
महोली कोतवाली क्षेत्र के ग्राम छेहलिया निवासी 35 वर्षीय दीपेंद्र कुमार पुत्र रमेश कुमार पेशे से राजगीर थे। परिवार के अनुसार दीपेंद्र रोज की तरह गुरुवार सुबह मजदूरी के लिए घर से निकले थे। पड़ोसी गांव प्यारेपुर में एक पुराने और जर्जर मकान की छत की मरम्मत का काम चल रहा था, जहां वह काम कर रहे थे।
अचानक भरभराकर गिरी छत
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मरम्मत कार्य के दौरान अचानक मकान की कमजोर छत भरभराकर नीचे गिर गई। इससे पहले कि दीपेंद्र खुद को संभाल पाते, वह भारी मलबे के नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद लोगों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर दीपेंद्र को बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनकी मौत हो चुकी थी।
परिवार में मचा कोहराम
घटना की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। पत्नी किरन देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक अपने पीछे पत्नी समेत चार छोटे बच्चों को छोड़ गया है। पिता की अचानक मौत से बच्चों के सिर से साया उठ गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि दीपेंद्र मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। हादसे के बाद गांव के लोग भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची
हादसे की जानकारी मिलते ही तहसीलदार अंकुर यादव, राजस्व निरीक्षक संजीव मिश्रा और लेखपाल विनीत अवस्थी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर परिजनों को ढांढस बंधाया। वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।
जर्जर मकानों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर जर्जर मकानों में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के मरम्मत कार्य कराए जाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने और कमजोर भवनों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती, जिसकी वजह से ऐसे हादसे सामने आते रहते हैं। फिलहाल गांव में मातम पसरा हुआ है और हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर मेहनत मजदूरी कर परिवार पालने निकला दीपेंद्र इतनी दर्दनाक मौत का शिकार क्यों बना।
रिपोर्ट – वली चौधरी
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