युद्धविराम के बाद भी शेयर बाजार धड़ाम, निवेशकों में चिंता
ईरान-अमेरिका युद्धविराम की खबरों के बावजूद गुरुवार को शेयर बाजार धड़ाम हो गया. सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का और निफ्टी भी टूट गया, जिससे 5 दिन की तेजी पर ब्रेक लग गया.

4pm न्यूज नेटवर्क: ईरान-अमेरिका युद्धविराम की खबरों के बावजूद गुरुवार को शेयर बाजार धड़ाम हो गया. सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का और निफ्टी भी टूट गया, जिससे 5 दिन की तेजी पर ब्रेक लग गया. समझौते पर बना संशय, महंगे होते कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और मुनाफावसूली जैसी बड़ी वजहों ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया.
शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए गुरुवार का दिन निराशाजनक रहा. बीते पांच लगातार कारोबारी सत्रों से बाजार में जो शानदार तेजी देखने को मिल रही थी, उस पर अचानक ब्रेक लग गया है. सेंसेक्स दिन के निचले स्तर पर पहुंचते हुए करीब 1,000 अंक तक लुढ़क कर 76,558 के स्तर पर आ गया. वहीं, निफ्टी भी 255 अंकों का गोता लगाकर दोपहर 3 बजे तक 23,740 के स्तर से नीचे खिसक गया.
बाजार की इस अचानक आई गिरावट ने आम निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके पोर्टफोलियो पलक झपकते ही लाल निशान में आ गए. जहां इंफोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे बड़े शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई, वहीं निफ्टी आईटी इंडेक्स भी करीब 1% तक टूट गया. आखिर वह कौन सी वजहें हैं जिन्होंने बाजार का मूड अचानक बिगाड़ दिया?
शांति समझौते पर मंडराता खतरा
बाजार की इस बड़ी गिरावट का पहला और सबसे अहम कारण ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की उम्मीदों का कमजोर पड़ना है. जब दोनों देशों के बीच शांति समझौते की खबर आई थी, तब दुनियाभर के बाजारों ने राहत की सांस ली थी. लेकिन अब स्थिति फिर से उलझती दिख रही है. ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल दोनों ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है.
इजराइल का लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान अब भी जारी है. इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो व्यापार के लिए खुलने वाला था, वह अभी भी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद है. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर समझौते का पालन नहीं हुआ, तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है.
कच्चे तेल में फिर से लगी आग
शेयर बाजार के गिरने का दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आया उछाल है. युद्धविराम की शुरुआती खबरों के बाद जो कच्चा तेल 110 डॉलर से गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया था, वह अब दोबारा तेजी पकड़ रहा है. मध्य पूर्व में तनाव कम न होने के कारण ब्रेंट क्रूड 2% उछलकर 96.70 डॉलर और WTI क्रूड 3% बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.
तीसरी वजह वैश्विक बाजारों का कमजोर होना है. शांति समझौते पर बने संशय के कारण पूरी दुनिया के बाजार दबाव में हैं. जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और चीन का शंघाई कंपोजिट, ये सभी लाल निशान में बंद हुए हैं. अमेरिकी बाजार के वायदा कारोबार (Dow Jones futures) भी गिरावट का ही संकेत दे रहे हैं.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
चौथा बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है. दलाल स्ट्रीट पर विदेशी निवेशक पिछले 26 सत्रों से लगातार अपने शेयर बेच रहे हैं. बुधवार को ही उन्होंने करीब 2,812 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों के इस तरह पैसा निकालने से बाजार का मनोबल टूटता है.
पांचवीं वजह भारतीय रुपये की कमजोरी है. पिछले कुछ दिनों की अच्छी रिकवरी के बाद, गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 92.70 के स्तर पर आ गया. मार्च की भारी गिरावट के बाद रिजर्व बैंक (RBI) ने कुछ सख्त कदम उठाकर रुपये को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन यह वैश्विक दबाव के आगे फिर से नरम पड़ता दिख रहा है.
मुनाफे के बाद ‘प्रॉफिट-बुकिंग’
बाजार के लुढ़कने का छठा और अंतिम कारण निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली है. अप्रैल की शुरुआत के पांच दिनों में ही सेंसेक्स में 5,600 से ज्यादा अंकों (करीब 8%) का शानदार उछाल आया था. जब बाजार ऊंचे स्तर पर पहुंचता है, तो निवेशक अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचना शुरू कर देते हैं, जिसे ‘प्रॉफिट बुकिंग’ कहा जाता है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, अगर मध्य पूर्व में युद्धविराम कायम रहता है, तो बाजार में मजबूती बनी रहेगी. लेकिन अगर शांति समझौता रद्द होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें और भड़क सकती हैं जो बाजार के लिए खतरनाक होगा. हालांकि, उनका यह भी कहना है कि अच्छी कंपनियों के शेयर जो बिकवाली के कारण अभी सस्ते मिल रहे हैं, वे कभी भी वापस उछाल मार सकते हैं. ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में शेयर बेचने के बजाय धैर्य बनाए रखना ही समझदारी है.



