हड्डियां इन योगासनों से होंगी मजबूत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आज की भागदौड़ भरी जि़ंदगी में कमजोर हड्डियां एक आम समस्या बन चुकी है। गलत खान-पान, बैठकर काम करना, धूप की कमी और एक्सरसाइज न करना इसके मुख्य कारण हैं। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए योग एक प्राकृतिक, सुरक्षित और असरदार उपाय है। योग न सिर्फ हड्डियों को मजबूती देता है बल्कि मांसपेशियों, जोड़ों और रीढ़ की हड्डी को भी स्वस्थ रखता है। अगर आप लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रहना चाहते हैं, तो योग को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें। नियमित योग अभ्यास से हड्डियां मजबूत होती हैं, जोड़ों का दर्द कम होता है और शरीर में नई ऊर्जा आती है।

वृक्षासन

यह आसन पैरों की हड्डियोंं और जोड़ों को मजबूती देता है। वृक्षासन का नियमित अभ्यास घुटनों और टखनों को मजबूत बनाता है। यह आसन संतुलन और एकाग्रता में सुधार लाता है। यह योगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। अगर आप इस योगासन का नियमित अभ्यास करेंगे, तो इससे पैरों में संतुलन और स्थिरता में सुधार होगा। इस योगासन के अभ्यास से पैर और हाथों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे बच्चों की लंबाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वृक्षासन के नियमित अभ्यास से दिमाग को स्वस्थ और संतुलित रखने में मदद मिलती है। सतर्कता और एकाग्रता में सुधार करने के लिए इस योग के अभ्यास को फायदेमंद माना जाता है। वृक्षासन मूड को बेहतर बनाने और तनाव से राहत देने में फायदेमंद हो सकता है।

ताड़ासन

यह योगासन शरीर को खींचता है और हड्डियों पर सकारात्मक दबाव डालता है, जिससे उनकी घनत्व बढ़ती है। ताड़ासन के अभ्यास के कई फायदे हैं। ताड़ासन शब्द ताड़ के वृक्ष से लिया गया है। इसीलिए, इसे अंग्रेजी में क्कड्डद्यद्व ञ्जह्म्द्गद्ग क्कशह्यह्लह्वह्म्द्ग कहते हैं। जिस प्रकार से ताड़ का पेड़ एक सीध में खड़ा रहता है उसी प्रकार से ताड़ासन योग किया जाता है। यह एक बेहतरीन योगासन है, जिसे आप आसानी से अपने घर में कर सकते हैं। इस योग को करने से आपकी रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में सुधार होता है। इसके साथ ही यह आपके बैलेंस को बेहतर बनाता है। जिनकी लंबाई नहीं बढ़ रही है उन्हें ताड़ासन नियमित रूप से करना चाहिए।

भुजंगासन

भुजंगासन का अभ्यास रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों के लिए बेहद लाभकारी है। इससे स्पाइन मजबूत होता है और पीठ दर्द में राहत मिलती है। पूर्ण भुजंगासन अभ्यास सावधानी के साथ करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले पेट के बल लेटें। हथेलियां कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए छाती, गर्दन और सिर ऊपर उठाएं, कोहनियां थोड़ी मोड़ें और कंधे पीछे की ओर खींचें। इसके बाद घुटने मोडक़र पैरों के पंजे ऊपर उठाएं। सिर-गर्दन पीछे तानें और पैरों से सिर छूने की कोशिश करें। आराम से जितनी देर हो सके शरीर पर बिना दबाव डाले इस मुद्रा में रुकें।

वीरभद्रासन

यह योगासन पूरे शरीर के वजन को संतुलित करता है। इस आसन के अभ्यास से जांघों और कूल्हों की हड्डियां मजबूत होती हैं। वीरभद्रासन करने से स्टैमिना बढ़ता है। वीरभ्रदासन 2 को अंग्रेजी में वॉरियर पोज 2 के नाम से जाना जाता है। इस आसन को करने से शरीर में ताकत, एनर्जी और बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलती है। शरीर को मजबूत बनाने और फिटेनस गोल पाने के लिए इस आसन की रेगुलर प्रैक्टिस की जा सकती है।

सेतुबंधासन

यह आसन रीढ़ और कमर के लिए बहुत फायदेमंद है। सेतुबंधासन के अभ्यास से रीढ़ का लचीलापन बढ़ता है। साथ ही यह आसन बोन लॉस कम करता है। खानपान की गलत आदतें और काम का बढ़ता तनाव पुरुषों के ओलरऑल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। ऐसे में लोगों के बीच योग का महत्व भी काफी बढ़ गया है। रोजाना सिर्फ 6 मिनट सेतुबंधासन करने से पुरुषों के स्वास्थ्य को काफी फायदा मिलता है। इस आसन को ब्रिज पोज भी कहा जाता है, जो पीठ को मजबूत करने और छाती को खोलने में मदद करते हैं।

कमजोरी के कारण

कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, बढ़ती उम्र, ज्यादा देर बैठना, धूप में न जाना, हार्मोनल बदलाव और तनाव और खराब जीवनशैली का हड्डियोंपर बहुत बुरा असर पड़ता है।

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