बरेली नगर निगम के पड़ोस में गंदगी का साम्राज्य, शायद यही है स्मार्टनेस का नया मॉडल
बरेली स्मार्ट सिटी में नगर निगम कार्यालय से मात्र 100 मीटर दूर पुरानी सब्जी मंडी के पास मुख्य नाला कूड़े और गाद से चोक हो गया है। बदबू से ग्राहक दूर हो रहे हैं, व्यापार प्रभावित है और मानसून से पहले जलभराव का खतरा बढ़ गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एक ओर बरेली को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम मुख्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर मौजूद पुरानी सब्जी मंडी के पास का मुख्य नाला इन दावों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। प्लास्टिक, सड़ी-गली सब्जियों, कचरे और गाद से भरा यह नाला न केवल बदबू फैला रहा है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है।
बुधवार को 4 PM की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान नाले में पानी से ज्यादा कूड़ा दिखाई दिया। कई स्थानों पर बहाव पूरी तरह बाधित था, जबकि नाले के ऊपर जमी गंदगी पर मक्खियों और मच्छरों का जमावड़ा लगा हुआ था।
करोड़ों के बजट के बावजूद क्यों नहीं साफ हुआ नाला?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम हर वर्ष नाला सफाई और स्वच्छता व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है। इसके बावजूद शहर की सबसे व्यस्त मंडियों में शामिल इस इलाके में छह महीने से समुचित सफाई नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम कार्यालय के आसपास की स्थिति ऐसी है, तो शहर के दूरदराज इलाकों में सफाई व्यवस्था की हालत कैसी होगी?
व्यापार पर पड़ा असर, दुकानदारों ने जताई नाराजगी
करीब 25 वर्षों से सब्जी का कारोबार कर रहे हरीश चंद्र बताते हैं कि बदबू और गंदगी के कारण ग्राहक मंडी में रुकना नहीं चाहते। उनका दावा है कि पहले जहां उनकी बिक्री 15 हजार रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती थी, वहीं अब यह घटकर करीब 4 हजार रुपये रह गई है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नगर निगम, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से कई बार शिकायत की, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
बारिश से पहले बढ़ी चिंता
फल विक्रेता नसीम का कहना है कि नाले का गंदा पानी कई बार दुकानों तक पहुंच जाता है। उनका आरोप है कि यदि मानसून से पहले सफाई नहीं हुई तो जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ग्राहक भी उठा रहे सवाल
राजेंद्र नगर से खरीदारी करने पहुंचीं मंजू देवी ने कहा कि खाद्य पदार्थों की मंडी के आसपास इस तरह की गंदगी चिंता का विषय है। उनका कहना है कि साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए ताकि लोग बिना परेशानी खरीदारी कर सकें। वहीं कॉलेज छात्र अभिषेक ने कहा कि स्मार्ट सिटी की अवधारणा केवल परियोजनाओं और बोर्डों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसकी झलक जमीनी स्तर पर भी दिखाई देनी चाहिए।
स्वास्थ्य पर भी मंडरा रहा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार जमा गंदगी और ठहरे हुए पानी से मच्छरों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां संक्रामक बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकती हैं, खासकर मानसून के दौरान।
जवाबदेही का सवाल
स्मार्ट सिटी परियोजना का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन पुरानी सब्जी मंडी के बाहर की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि सफाई व्यवस्था की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? अब स्थानीय लोगों और व्यापारियों की निगाहें नगर निगम पर टिकी हैं। देखना होगा कि सफाई अभियान के दावे जमीन पर कब उतरते हैं और मंडी क्षेत्र को इस समस्या से कब राहत मिलती है।
रिपोर्ट: सुनील सक्सेना, बरेली
यह भी पढ़ें: बांदा में अवैध खनन को लेकर किसानों का प्रदर्शन, पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप, डीएम से लगाई गुहार



