तलवों के दर्द में राहत देंगे ये योगासन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
अक्सर देखा गया है हैं कि सुबह उठते ही जैसे ही हम जमीन पर पैर रखते हैं, तलवों में तेज दर्द महसूस होता है? यह समस्या आजकल बहुत आम हो गई है, खासकर उन लोगों में जो लंबे समय तक खड़े रहते हैं या गलत जूते पहनते हैं। वैसे तलवों में दर्द के कई कारण है, जैसे प्लांटर फैसिसाइटिस यानी एड़ी और तलवे में सूजन आने पर, लंबे समय तक खड़े रहने, सख्त सतह पर चलने, गलत जूते पहनने और मोटापा या वजन बढऩे पर पैरों में दर्द बढ़ जाता है। इस दर्द को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। इसलिए इसे नजरअंदान न करें। वैसे अच्छी बात यह है कि कुछ योगासन अपनाकर आप तलवों केइस दर्द से राहत पा सकते हैं , वो भी बिना किसी दवाईं के।

ताड़ासन

ताड़ासन को समस्थिति भी कहा जाता है। ताड़ शब्द का अर्थ संस्कृत में पर्वत होता है, जिसके ऊपर इस आसन का नाम रखा गया है। ताड़ासन योग का एक मूलभूत आसन है क्योंकि यह आसन अनेक आसनों का आधार है। ताड़ासन के अभ्यास के लिए दोनो पंजों को मिलाकर खड़े हो जायें, और बाज़ुओं को बगल में रखें। शरीर का वजन दोनों पैरों पर समान रूप से वितरित करें। भुजाओं को सिर के उपर उठाएं। उंगलियों को आपस में फंसा कर हथेलियों को ऊपर की तरफ रखें। सिर के स्तर से थोड़ा ऊपर दीवार पर एक बिंदु पर आंखें टीका करें रखें। पुर अभ्यास के दौरान आंखें इस बिंदु पर टिका कर रखें। बाज़ुओं, कंधों और छाती को ऊपर की तरफ खींचें और फैलाएं। पैर की उंगलियों पर आ जायें ताकि दोनो एड़ी उपर उठ जायें। बिना संतुलन और बिना पैरों को हिलायें, पूरे शरीर को ऊपर से नीचे तक ताने। श्वास लेते रहें और कुछ सेकंड के लिए इस मुद्रा में ही रहें। ये पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और तलवों में रक्त संचार बढ़ाता है।

वृक्षासन

वृक्षासन (ट्री पोज़) एक प्रसिद्ध योगासन है। शरीर का संतुलन और स्थिरता बेहतर होती है। पैरों, टखनों और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मन शांत होता है और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ती है। इस आसन के अभ्यास के लिए एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को जांघ पर रखें। संतुलन बनाए रखें। वृक्षासन का नियमित अभ्यास बैलेंस और स्ट्रेंथ बढ़ाता है। पैरों के दर्द को कम करता है। जल्दी राहत पाने के लिए सही और आरामदायक जूते पहनें।

पादांगुष्ठासन

योग का एक बुनियादी और महत्वपूर्ण आसन है, जिसका नाम संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है पाद यानी पैर, अंगुष्ठ यानी पैर का अंगूठा, और आसन। इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े हो जाएं। फिर आगे की ओर झुककर दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ें। पादांगुष्ठासन का अभ्यास तलवों और हैमस्ट्रिंग को स्ट्रेच करता है। इससे शरीर, खासकर पैरों की अकडऩ कम होती है। जल्दी राहत पाने के लिए साथ ही ज्यादा देर खड़े रहने से बचें। इसका अभ्यास करने से टांगों, घुटनों और टखऩों में खिचाव लाता है और उन्हे मज़बूत बनाता है। जिस टांग को आप उठाते हैं, उस टाँग की हॅम्स्ट्रिंग और कूल्हे में ख़ास तौर से अच्छा खचाव लाता है। जिस टाँग पर आप खड़े होते हैं, उसको यह ख़ास तौर से मज़बूत बनाता है। ध्यान रखने की क्षमता में सुधार लाता है। आपके शारीरिक संतुलन को बढ़ाता है।

अधो मुख श्वानासन

अधो मुख श्वानासन का नाम तीन शब्दों के मेल से रखा गया है अध: मुख और श्वान। अधस् का मतलब नीचे की ओर गया हुआ, मुख यानी मूह, और श्वान का अर्थ है कुत्ता। अधो मुख श्वानासन सूर्य नमस्कार ए और सूर्य नमस्कार बी का एक स्टेप है। ये योगासन शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है, रीढ़ की हड्डी को लंबा करता है, और मन को शांत करता है। इस आसन के अभ्यास से एड़ी और तलवे में खिंचाव आता है। एडिय़ों के दर्द में तुरंत राहत मिलती है। अधोमुख श्वानासन के अभ्यास के लिए जमीन पर घुटनों और हाथों के बल आएं (मेज की स्थिति)। सांस छोड़ते हुए घुटनों को सीधा करें और अपने कूल्हों (हिप्स) को ऊपर उठाएं। शरीर से उल्टा वी आकार बनाएं। हाथों को जमीन पर मजबूती से दबाएं और सिर को कंधों के बीच रखें। प्रमुख लाभ बाजू और टांगें मजबूत होती हैं। कंधे और हैमस्ट्रिंग में खिंचाव आता है।सिरदर्द और थकान से राहत मिलती है। जल्दी राहत पाने के लिए गर्म पानी से पैर सेंकें।

मालासन

मालासन जिसे गारलैंड पोज या योगिक स्क्वाट के नाम से भी जाना जाता है। मालासन या माला आसन एक बैठने वाला आसन है जो पाचन तंत्र, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों को लाभ पहुंचाता है। इस मुद्रा का नाम संस्कृत के शब्द ‘माला’ से आया है, जिसका अर्थ है माला, और ‘आसन’, जिसका अर्थ है योग मुद्रा। मालासन के अभ्यास के लिए स्क्वाट पोजिशन में बैठें और हाथ जोड़ें। इस आसन के अभ्यास के कई फायदे हैं। इससे पैरों की फ्लैक्सिबिटी बढ़ती है और दर्द व सूजन से राहत मिल सकती है। जल्दी राहत पाने के लिए योग के अलावा सुबह उठते ही स्ट्रेचिंग करें।

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