कश्मीरी पंडितों की चेतावनी: सुरक्षित आवास दो, वरना करेंगे भूख हड़ताल

आतंकी धमकियों के बीच, वे सुरक्षित जगह न मिलने से चिंतित हैं. कर्मचारियों ने भूख हड़ताल की भी चेतावनी दी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारी सुरक्षित आवास की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. आतंकी धमकियों के बीच, वे सुरक्षित जगह न मिलने से चिंतित हैं. कर्मचारियों ने भूख हड़ताल की भी चेतावनी दी है.

जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री के रोजगार पैकेज के तहत काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने बुधवार को श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया. वे सुरक्षित घर की मांग कर रहे हैं.

उनका कहना है कि उनके काम करने की जगह पर सुरक्षा ठीक है, लेकिन लगातार आतंकवादी धमकियों और डराने-धमकाने को देखते हुए, वे रहने के लिए सुरक्षित जगह की कमी को लेकर परेशान हैं.

श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने प्रशासन से पूरी हो चुकी आवासीय इमारतों में उन्हें जल्द से जल्द रहने की सुविधा देने की मांग की. इसके साथ ही कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर 30 सितंबर तक उन्हें सुरक्षित आवास का कब्जा नहीं दिया गया, तो वे अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने पर मजबूर होंगे.

आतंकी संगठन की ओर से टारगेट करने की धमकी

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब आतंकवादी संगठन की ओर से उन्हें टारगेट करने की धमकी दी गई है. आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने कश्मीर में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी दी है. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, आतंकवादियों ने सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी साझा किए थे.

बनकर तैयार 26 इमारतों में रहने की करें व्यवस्था

प्रेस एन्क्लेव में विरोध प्रदर्शन कर रहे एक कर्मचारी ने कहा, ‘हम अपने काम की जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था से खुश हैं. हमारी एकमात्र चिंता रहने की जगह है. प्रशासन को उन 26 बिल्डिंगों में कर्मचारियों को अलॉटमेंट करना चाहिए जो पूरी हो चुकी हैं.’उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को किसी न किसी बहाने से रहने की जगह के लिए इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है.

उन्होंने पूछा, ‘इन 26 बिल्डिंग्स के लिए सभी क्लियरेंस मिल चुकी हैं, जिनमें करीब 400 कर्मचारी रह सकते हैं. वे कर्मचारी को इन इमारतों में कब्जा क्यों नहीं दे रहे हैं?’ हम पिछले 16 सालों से यहां काम कर रहे हैं और हमारे पास अभी भी सुरक्षित रहने की जगह नहीं है.

2008 में शुरू हुआ था प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज

कश्मीरी माइग्रेंट्स के लिए प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज की घोषणा साल 2008 में की गई थी. इसके बाद 2010 से इसके तहत नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई. इसका उद्देश्य विस्थापित कश्मीरी युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके पुनर्वास में मदद करना था. इसके तहत सरकारी नौकरियों के साथ ट्रांजिट आवास की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई थी.

अब प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की मांग है कि सरकार तैयार आवासीय इकाइयों का जल्द आवंटन करे, ताकि उन्हें सुरक्षा के साथ अपने कार्यस्थलों पर रहकर काम करने में सुविधा मिल सके. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर 30 सितंबर तक उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे.

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