होर्मुज में सैनिक क्यों नहीं भेजेगा अमेरिका? ट्रंप और रुबियो के बयान के बाद समझिए पूरा मामला
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो के बयान के बाद साफ है कि अमेरिकी सैनिक वहां नहीं उतरेंगे। जानिए क्यों होर्मुज को अमेरिकी सेना के लिए ‘मौत का कुआं’ माना जा रहा है और इसके पीछे क्या रणनीतिक वजहें हैं।

4pm न्यूज नेटवर्क: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दुनिया की नजर एक बार फिर उस समुद्री रास्ते पर टिक गई है, जिससे होकर दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयानों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका होर्मुज में अपने सैनिक उतारने का जोखिम नहीं उठाएगा। ट्रंप ने साफ कहा कि जिन देशों को तेल की जरूरत है, वे खुद वहां जाकर रास्ता खोलें।
यह बयान उस समय आया है जब युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने की खबरों के बाद अमेरिका ने वहां सैन्य कार्रवाई की तैयारी पर चर्चा की थी। लेकिन कई दौर की बैठकों के बाद अमेरिका ने वहां सीधे सैनिक भेजने से दूरी बना ली।
अमेरिका क्यों पीछे हटा?
जानकारों का मानना है कि होर्मुज का इलाका अमेरिकी सैनिकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यहां जरा सी गलती भी बड़े सैन्य नुकसान में बदल सकती है। यही वजह है कि रणनीतिक स्तर पर अमेरिका ने सीधा सैन्य हस्तक्षेप करने से बचने का फैसला किया।
भौगोलिक स्थिति ईरान के पक्ष में
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दरअसल पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ़ ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह जलडमरूमध्य इतना संकरा और उथला है कि यहां बड़े युद्धपोतों को सुरक्षित तरीके से ऑपरेट करना आसान नहीं होता। रणनीतिक रूप से यह इलाका ईरान के लिए ज्यादा अनुकूल माना जाता है। अगर यहां सीधे युद्ध होता है तो अमेरिकी सेना को भारी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
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ड्रोन से भी हो सकता है बड़ा नुकसान
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा सलाहकारों ने ट्रंप को बताया था कि इस इलाके में युद्धपोत भेजना जोखिम भरा हो सकता है। रास्ता संकरा होने की वजह से एक छोटा सा ड्रोन हमला भी बड़े जहाजों को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो न सिर्फ सैन्य नुकसान होगा, बल्कि अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर पड़ सकता है।
सैनिकों के लिए लैंड करना भी आसान नहीं
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies के इंटरनेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम से जुड़े विशेषज्ञ और पूर्व मरीन अधिकारी मार्क कैन्सियन का कहना है कि इस इलाके में सैनिकों को उतारना ही बहुत मुश्किल काम है। उनके मुताबिक जैसे ही सैनिक लैंड करेंगे, वे सीधे हमले की जद में आ सकते हैं। ऐसे में ऑपरेशन की शुरुआत में ही भारी नुकसान का खतरा है।
पुराने युद्धों से सीखा सबक
अमेरिका पहले भी भौगोलिक चुनौतियों को नजरअंदाज करने की कीमत चुका चुका है। वियतनाम युद्ध और अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिका को लंबे समय तक संघर्ष और भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहते जिससे अमेरिका को लंबे समय तक युद्ध में फंसना पड़े।
राजनीति भी एक बड़ा कारण
इस साल के आखिर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में अगर किसी सैन्य ऑपरेशन में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है, तो इसका असर सीधे राजनीति पर पड़ सकता है। इसके अलावा इस युद्ध पर अब तक 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुका है। ऐसे में अमेरिका किसी नए बड़े सैन्य अभियान से बचना चाहता है।
दुनिया की नजर होर्मुज पर
दुनिया के लिए स्ट्रेट ऑफ होरमज़ बेहद अहम समुद्री रास्ता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यही कारण है कि यहां होने वाली हर हलचल का असर सीधे वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ता है। अभी के लिए अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह इस इलाके में सीधे सैनिक उतारने से बचना चाहता है। लेकिन मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में फिर सुर्खियों में रह सकता है।
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