किसानों की आवाज पर सरकार चुप क्यों? गोपाल इटालिया ने CM पटेल को लिखा पत्र

बिजली खंभों के मुद्दे को लेकर किसानों की समस्याओं पर AAP ने गुजरात सरकार पर सवाल उठाए हैं... गोपाल इटालिया ने मुख्यमंत्री... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात राज्य में इन दिनों किसान एक बड़े मुद्दे को लेकर चिंतित हैं.. उनकी उपजाऊ जमीन पर निजी बिजली कंपनियां बिजली के ऊंचे खंभे लगा रही हैं.. किसान कहते हैं कि इससे उनकी खेती प्रभावित हो रही है.. जमीन का मूल्य घट रहा है.. और उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा.. इस मुद्दे पर पिछले डेढ़ हफ्ते से मोरबी जिले के किसान शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं.. अब आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर.. इस समस्या का समाधान करने की अपील की है..

मोरबी जिले के जेतपार गांव में किसान पिछले कई दिनों से उपवास पर बैठे हैं.. वे अपनी जमीन बचाने और उचित हक मांगने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं.. गोपाल इटालिया ने अपने पत्र में लिखा है कि.. सरकार को इन किसानों से बात करनी चाहिए.. वे हिंदू किसान हैं, जो शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं.. लेकिन सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही.. इटालिया ने सवाल उठाया कि चुनाव के समय हिंदुत्व के नाम पर वोट लेने के बाद.. अब इन किसानों की मदद क्यों नहीं की जा रही..

किसानों की मुख्य शिकायत यह है कि निजी बिजली कंपनी उनके खेतों में बिना पूछे या उचित सहमति के खंभे लगा रही है.. वहीं ये खंभे ऊंचे होते हैं.. और उनसे हाई वोल्टेज की लाइनें गुजरती हैं.. एक खंभा लगने के बाद आसपास की जमीन पर खेती करना मुश्किल हो जाता है.. ट्रैक्टर या अन्य मशीनें आसानी से नहीं चल पाती.. फसल भी प्रभावित होती है.. किसान कहते हैं कि कंपनी उन्हें बहुत कम मुआवजा दे रही है.. जो उनके नुकसान की भरपाई नहीं करता..

मोरबी के जेतपार गांव के किसानों ने बताया कि यहां 765 केवी की लाइनें गुजर रही हैं.. कई खंभे और तारों के कारण सैकड़ों एकड़ जमीन प्रभावित हो रही है.. किसानों की मांग है कि खंभा लगाने से पहले पूरा मुआवजा दिया जाए.. कुछ किसान तो प्रति खंभा एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं.. वे कहते हैं कि पहले के प्रोजेक्ट्स में ज्यादा मुआवजा मिला था.. लेकिन अब कम दिया जा रहा है.. इससे किसानों में असंतोष बढ़ गया है..

पिछले 12-15 दिनों से जेतपार के किसान उपवास पर हैं.. कुछ महिलाएं भी इसमें शामिल हैं.. वे कहती हैं कि यह उनकी जमीन है, विरासत है.. बिना पूछे कंपनी मशीनें लेकर आ जाती है.. विरोध करने पर पुलिस का इस्तेमाल होता है.. कई जगहों पर लाठीचार्ज की खबरें आई हैं.. जिसमें महिलाओं पर भी बल प्रयोग का आरोप है.. किसान शांतिपूर्ण रहकर भी अपनी बात रख रहे हैं.. लेकिन सरकार से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा..

AAP विधायक गोपाल इटालिया ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को विस्तार से पत्र लिखा.. उन्होंने लिखा कि गुजरात भर में कई जगह किसान इस मुद्दे पर भूख हड़ताल पर हैं.. मोरबी के अलावा कोंध, साणंद के डारेड, वढवाण के नगरा, कच्छ, द्वारका, जामनगर, राजकोट और जूनागढ़ जिलों के गांवों में भी विरोध चल रहा है.. इटालिया ने कहा कि सरकार मोरबी के उन किसानों को बातचीत के लिए नहीं बुलाती.. जो शांतिपूर्ण उपवास कर रहे हैं.. अगर किसान गुस्से में बोलते हैं तो सरकार कहती है कि आंदोलन हिंसक न हो.. लेकिन जब शांतिपूर्ण विरोध होता है तो उनकी बात नहीं सुनी जाती.. फिर किसान क्या करें..

आपको बता दें कि उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव में हिंदुत्व के मुद्दे पर वोट लेने के बाद.. अब हिंदू किसानों की आवाज गांधीनगर तक नहीं पहुंच रही.. क्या मोरबी या गुजरात के हिंदू किसानों ने आपको वोट नहीं दिया.. जब मदद की जरूरत है तो सरकार कंपनी का साथ क्यों दे रही है.. इटालिया ने सरकार से आग्रह किया कि वह आगे बढ़े.. किसानों से मिले और उचित समाधान निकाले.. यह समस्या सिर्फ मोरबी तक सीमित नहीं है.. गुजरात के कई जिलों में किसान एकजुट हो रहे हैं.. ट्रैक्टर रैलियां निकाली जा रही हैं.. अहमदाबाद से गांधीनगर तक किसान अधिकार यात्रा हुई.. जिसमें कांग्रेस और AAP ने समर्थन दिया.. किसान ऋण माफी, MSP की गारंटी और जमीन सुरक्षा की भी मांग कर रहे हैं..

हलवद तालुका में भी किसानों ने काम रोका.. वे कहते हैं कि 765 केवी पावर ग्रिड लाइन के लिए कम मुआवजा दिया जा रहा है.. पहले के प्रोजेक्ट्स में प्रति किसान एक लाख तक मिला, अब कम.. किसान जेसीबी लेकर खंभे उखाड़ने की कोशिश भी कर चुके हैं.. कच्छ से लेकर सौराष्ट्र तक निजी कंपनियां (कई जगह अडानी ग्रुप से जुड़ी परियोजनाओं का जिक्र) लाइनें बिछा रही हैं.. किसानों का आरोप है कि सहमति नहीं ली जाती, पुलिस का दबाव डाला जाता है.. भूमि अधिग्रहण में भी अनियमितताएं बताई जा रही हैं..

किसान गुजरात की रीढ़ हैं.. वे कपास, मूंगफली, गेहूं जैसी फसलें उगाते हैं.. बिजली के खंभे लगने से न सिर्फ फसल नुकसान होता है.. बल्कि लंबे समय तक जमीन अनुपजाऊ हो सकती है.. हाई वोल्टेज लाइनों से स्वास्थ्य पर असर, फसलों पर.. और मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है.. इसकी भी चिंता है.. एक किसान ने बताया कि हमारी जमीन पर खंभा लग जाएगा तो 50 साल तक हम किराया क्यों नहीं मांग सकते.. यह हमारी संपत्ति है.. कई परिवारों की पूरी आजीविका इस जमीन पर टिकी है.. छोटे किसान तो और भी परेशान हैं.. कर्ज का बोझ, बाजार में अच्छा दाम न मिलना.. मौसम की मार के बीच यह नई समस्या आ गई है..

 

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