बहुत झेल लिया नफरत का जहर अब मोहब्बत की सरकार बनाएंगे
सहारनपुर सिटी में एनडीए के खिलाफ मुस्लिम समाज लामबंद

सहारनपुर सिटी से एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
सहारनपुर। सहारनपुर सिटी विधानसभा में इस बार सियासी पारा चढ़ गया है। गुज्जर और तेली बिरादरी ने एक सुर में एनडीए सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया है और इंडिया गठबंधन को खुला समर्थन दे दिया है।
सहारनपुर सिटी विधानसभा में 27 की सियासी बिसात बिछने लगी है। पसमांदा समाज ने नफरत की सियासत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
2०27 विनस चुनाव में लोकतंत्र की जीत होगी
तेली समाज से आने वाले हाजी इसरार ने हुंकार भरते हुए कहा – 2०27 विधानसभा चुनाव में लोकतंत्र की जीत होगी। नफरत की सरकार को हटाने के लिए हम तमाम पसमांदा और सेक्युलर लोग एकजुट होकर वोट करेंगे। आंकड़ों के साथ सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा – सहारनपुर में 5० प्रतिशत मुस्लिम वोटर है, जिसमें 92प्रतिशत पसमांदा वोटर है। अकेले तेली समाज के ही 75,००० वोटर हैं। इमरान मसूद को लेकर उन्होंने बड़ा सियासी बम फोड़ा – अगर इमरान मसूद सहारनपुर की कमान संभालते हैं तो 7 में से 7 सीट इंडिया गठबंधन जीतेगा। इमरान मसूद की बातों को लोग सुनते हैं और लब्बैक कहते हैं।

गुज्जर समाज का ऐलान- भाजपा को कभी वोट नहीं देंगे
गुज्जर समाज से मोहम्मद असगर ने कहा – हम खुलकर कांग्रेस के साथ हैं, भाजपा को हम कभी वोट नहीं देंगे। जब से भाजपा सरकार आई है, मोहब्बत और प्यार खत्म हो गया है। आपसी प्रेम और सौहार्द खत्म हो गया है। जगह-जगह हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत दिखाई देती है, जब यह सरकार नहीं थी तो आपसी भाईचारा था।
‘एनडीए मुसलमानों पर अत्याचार करती है’
तेली बिरादरी के मोहम्मद तहसीन मलिक ने कहा हम इंडिया गठबंधन को वोट करेंगे। एनडीए मुसलमानों के साथ अत्याचार करती है, इसलिए हम एनडीए को वोट नहीं करेंगे। मॉब लिंचिंग हो रही है, मदरसे गिराए जा रहे हैं, कई मस्जिदें गिराई जा रही हैं। मुस्लिम की तो एकदम खिलाफत हो रही है।
शाहनवाज मलिक बोले- हर समाज बदलाव चाहता है
तेली बिरादरी के ही शाहनवाज मलिक ने सरकार बदलने का ऐलान किया – हम सरकार का बदलाव चाहते हैं, हमें हर सूरत में इस सरकार का बदलाव करना ही है। मुसलमान ही नहीं, हर समाज का व्यक्ति इस सरकार से परेशान है। इमरान मसूद को हर समाज पसंद करता है, जैसे वह रूक्क बने वैसे ही इंडिया गठबंधन का विधायक भी बनेगा।
ओवैसी का एक वोटर नहीं, बाटोगे तो काटोगे, नफरती नारा
तेली बिरादरी के सीनियर नेता हाजी मोहम्मद इस्लाम ने सबसे आक्रामक बयान दिया – हम 5 साल से हर समय तैयारी में हैं कि किस तरह ये सरकार हटे। असदुद्दीन ओवैसी का एक भी वोटर सहारनपुर में नहीं है। मुसलमान का वोट सिर्फ इंडिया गठबंधन को ही जाएगा। उन्होंने कहा – इंडिया गठबंधन नफरत की राजनीति नहीं करता। हमारा नेता अखिलेश यादव है, हम उन्हें मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। राहुल गांधी हर समय सडक़ पर हैं, पब्लिक और नौजवानों के मुद्दे उठा रहे हैं। भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए हाजी ने कहा – बाटोगे तो काटोगे ये नफरती नारा है। हम नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान चाहते हैं। इन नफरतियों को हिंदुस्तानियों ने सिरे से नकार दिया है। बहुत दिन तक जनता को बरगलाया है, अब समझ आ गया है कि हमें मोहब्बत से रहना चाहिए। हमें वो सरकार चाहिए जिसमें हिंदू-मुस्लिम एक जगह बैठकर खाएं और आपसी भाईचारा बना रहे।
निर्वाचन क्षेत्र क्र म-1
सहारनपुर नगर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में से एक है, जिसका निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 3 है। सहारनपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र 1955 में अंतिम आदेश डीसी (1953-1955) के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया। इस निर्वाचन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और क्रम संख्या को अंतिम बार संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 2००8 में परिभाषित किया गया था।
राजनीतिक स्थिति और विधायक
2०22 का चुनाव: 22 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजीव गुंबर ने जीत हासिल की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार संजय गर्ग को हराया था। 2०17 का चुनावत्र्-र्ष 2०17 के चुनाव में इस सीट पर समाजवादी पार्टी के संजय गुंबर/संजय गर्ग ने जीत दर्ज की थी।
चुनावी समीकरण
यहाँ मुस्लिम, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मतदाता चुनावी नतीजों को तय करते हैं। समय-समय पर यहाँ के राजनीतिक दलों और विधायकों में बदलाव देखने को मिला है, जिससे यह सीट और अधिक चर्चा में रहती है।
नामकरण और स्थापना
परंपरा के अनुसार, इस नगर की स्थापना राजा सह रणवीर सिंह (सहारनवीर) ने की थी, जिन्हें यहाँ की जागीर दी गई थी। सूफी संत शाह हारून, शहर का नाम प्रसिद्ध सूफी संत संत शाह हारून चिश्ती के नाम पर भी रखा गया माना जाता है। अकबर के शासनकाल में इसका नाम शाहारूनपुर से बदलकर सहारनपुर कर दिया गया।
ऐतिहासिक कालक्रम
दिल्ली सल्तनत: 13वीं शताब्दी (लगभग 1211 ईस्वी) के आसपास यह क्षेत्र दलदली और वीरान था, जो बाद में गुलाम वंश और दिल्ली सल्तनत के अधीन आया। 1325 में यहाँ मोहम्मद बिन तुगलक का प्रभाव रहा और 1398 में तैमूर लंग ने भी यहाँ आक्रमण किया था। मुगल काल : अकबर के शासनकाल में इस क्षेत्र का प्रशासनिक और राजस्व संगठन हुआ। बाद में शाहजहाँ ने यहाँ बादशाही बाग और बादशाही महल जैसे शिकारगाहों का निर्माण कराया। मराठा शासन: 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में (1757 के बाद) यह शहर मराठों के नियंत्रण में आया और 1789 में मराठा राज्य का उत्तरी जिला बना। ब्रिटिश काल : वर्ष 18०3-18०4 में मराठा प्रतिरोध और सिख आक्रमणों के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस पर पूर्ण अधिकार कर लिया।
सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान
लकड़ी की नक्काशी: सहारनपुर को भारत की वुड क्राफ्ट कैपिटल कहा जाता है, क्योंकि यहाँ की लकड़ी की नक्काशी देश-विदेश में प्रसिद्ध है। धार्मिक स्थल: यहाँ माँ शाकुम्भरी देवी शक्तिपीठ, भूतेश्वर महादेव मंदिर और बागेश्वर महादेव मंदिर जैसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध स्थल स्थित हैं।
राहुल गांधी ने खरगे के लिए मांगा न्याय
कहा- शुद्धिकरण भी छुआछूत का दूसरा रूप, देश में संविधान-संघ की लड़ाई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भाजपा और आरएसएस पर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा है कि देश में आज भी दो विचारधाराओं संविधान और आरएसएस की विचारधारा की लड़ाई है।
राहुल गांधी ने देश में दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया और दावा किया कि देश में करोड़ों दलितों के साथ आज भी अन्याय हो रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि दशकों तक दलितों के साथ अत्याचार हुआ जो आज तक खत्म नहीं हो सका है। राहुल गांधी ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि दशकों तक दलितों के साथ भेदभाव होता रहा है और आज भी हो रहा है। चाय की दुकान पर दलितों के लिए अलग कप रखा जाता है और अभी भी शादी में दलितों को घोड़े पर चढऩे पर पीटा जाता है। स्कूलों में दलितों से सफाई कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा दलितों को आगे बढ़ते हुए देख नहीं पाती है। उन्होंने कहा कि जितना सफल दलित होता है, उतना बड़ा प्रहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि 8 अगस्त 26 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, श्री राम सेना के सदस्यों ने कथित तौर पर उसी स्थान पर शुद्धिकरण हवन किया। शुद्धिकरण करने वालों पर एफआईआर होनी चाहिए, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को न्याय मिलना चाहिए।
टॉक्सिक केफ्लॉप होने की केआरके ने पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। अपनी एक्टिंग व बेबाक टिप्पणी के लिए मशहूर कमाल राशिद खान अर्थात केआरकेफिल्म टॉक्सिक के रिव्यू पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर अपनी पोस्ट डाली है। उन्होंने लिखा है कि मैंने बहुत पहले ही कह दिया था कि फि़ल्म टॉक्सिक बुरी तरह फ्लॉप होगी।
क्योंकि जब किसी हीरो के आस-पास 1० हीरोइनें हों, तो वह फि़ल्म पर ध्यान नहीं दे सकता। ये रिव्यू इस बात का सबूत हैं कि यह फि़ल्म शुक्रवार तक भी नहीं टिक पाएगी। अपने साफगोई के लिए फिल्मी दुनिया में मशहूर कमाल राशिद खान ने इससे पहले भी कई रिव्यू दे चुकेंहैं। वह क्रिटिक बनकर दूसरी फिल्मों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते है। इससे पहले वह सलमान खान की फिल्म राधे, सरबजीत सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मे बताई थी।
वह अक्षय कुमार, रजनीकांत और एमी जैकसन स्टारर फिल्म 2.० को कचरा बताया था। ऐसा ही कुछ मोहनजोदड़ो,साहो व छिछोरे के लिए उन्होंने लिखा मैं रिव्यू के लिए वीडियो रिकॉर्ड करने की हालत में नहीं हूं।
क्यों कम हो रही है जियो प्लेटफाम्र्स में कर्मचारियों की संख्या
ये सवाल भी जोर शोर से उठा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। जियो का कारोबार बढ़ रहा है ग्राहक बढ़ रहे हैं लेकिन कर्मचारियों की संख्या घट रही है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जियो प्लेटफार्मस का हेडकाउंट लगभग 21 फीसदी घटकर 27,935 रह गया। उसी समय कंपनी का ग्राहक आधार 52 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है। सवाल यह भी कि क्या यह इफिशेंसी की कहानी है या रोजगार की बदलती तस्वीर?
52 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों वाली कंपनी और करीब 28 हजार कर्मचारियों का आंकड़ा अपने आप में बहस पैदा करता है। और अगर ्रढ्ढ भविष्य में इंसानों के काम का बड़ा हिस्सा संभालने वाला है तो जियो की घटती वर्कफोर्स को केवल एक संख्या मानकर छोड़ देना भी ठीक नहीं होगा। क्योंकि जियो अब सिर्फ मोबाइल कंपनी नहीं रहना चाहती क्योंकि जियो क्लाउड, जियो एआई, जीपीयू कम्यूटिंग और एआई कंजीटिव सर्विसेज की पेशकश कर रहा है। जियोब्रेन 5जी और एआई/एमएल को जोडऩे की कोशिश कर रहा है।
यानी कंपनी की नजर केवल टेलीकॉम के अगले पांच साल पर नहीं बल्कि एआई और क्लाउड इकॉनमी के अगले दौर पर है। और यहीं इस स्टोरी का सबसे बड़ा सवाल है कि क्या जियो आईपीओ असल में टेलीकॉम कंपनी की लिस्टिंग है या भारत के अगले एआई और डिजिटल साम्राज्य को बाजार से वैल्यू दिलाने की तैयारी? अगर दूसरा जवाब सही है तो निवेशक को और ज्यादा सावधान होना चाहिए। क्योंकि एआई की कहानी आज दुनिया की सबसे गर्म निवेश कहानियों में है। लेकिन एआई बोल देने से हर कंपनी एआई कंपनी नहीं बन जाती। एआई में पैसा लगता है डेटा सेंटर चाहिए और जीपीयू चाहिए, बिजली चाहिए, नेटवर्क चाहिए, क्लाउड चाहिए, रिसर्च चाहिए, प्रतिभा चाहिए और सबसे बढक़र चाहिए लगातार भारी पूंजी निवेश।
हमारा काम सिर्फ आगह कर देना
मीडिया का काम खबर देना है बाजार का काम कीमत तय करना है लेकिन निवेशक का काम फैसला करना है और फैसला करते समय एक बात याद रखिए कंपनी का नाम आपका पैसा नहीं बचाता रिलायंस का इतिहास शानदार हो सकता है जियो का विस्तार अभूतपूर्व हो सकता है ग्राहक आधार विशाल हो सकता है मुनाफा बढ़ रहा हो सकता है एआई का भविष्य चमकदार हो सकता है। फिर भी सवाल पूछिए कि आईपीओ का पैसा कहां जाएगा? कर्ज कितना है? कर्ज क्यों चुकाया जा रहा है? कंपनी की वैल्यूएशन कितनी है? कमाई के मुकाबले वैल्यूएशन उचित है या नहीं? मुनाफे का कितना हिस्सा कारोबार में वापस जाएगा? डिवेडेंट पालिसी क्या है? कर्मचारियों की संख्या क्यों घटी?
नाम देखकर पैसा मत लगाइए भीड़ देखकर पैसा मत लगाइए
जियो का आईपीओ आएगा तो उत्साह आएगा। शोर आएगा। टीवी स्टूडियो सजेंगे। बाजार विशेषज्ञ आएंगे। भविष्य की कहानियां सुनाई जाएंगी। आप सुनिए लेकिन खरीदने से पहले कैलकुलेटर निकालिए क्योंकि नाम देखकर पैसा मत लगाइए भीड़ देखकर पैसा मत लगाइए विज्ञापन देखकर पैसा मत लगाइए एआई सुनकर पैसा मत लगाइए रिलायंस देखकर भी पैसा मत लगाइए पहले पूछिए मेरे 100 रूपये के बदले कंपनी मुझे वास्तव में क्या दे रही है? यही सवाल आपको निवेशक बनाता है। बाकी सब आपको सिर्फ ग्राहक बनाता है।
मंगला एक्सप्रेस में पैंट्रीकार का खाना खाने से 30 छात्र बीमार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन से केरलम के एर्नाकुलम जा रही मंगला एक्सप्रेस में शुक्रवार देर रात करीब 30 स्कूली बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। खाना खाने के कुछ देर बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हुई। जिसमें 5 बच्चों की हालत गंभीर हो गई।
इस घटना के बाद हडक़ंप मच गया, प्रशासन ने आनन-फानन में ट्रेन को खंडवा स्टेशन पर रोककर सभी बच्चों का इलाज कराया गया। रात ट्रेन को खंडवा स्टेशन पर करीब 50 मिनट के लिए रोका गया। रेलवे और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तत्काल स्टेशन पर पहुंचकर बच्चों को प्राथमिक उपचार कर दवाएं दीं। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से बीमार 5 बच्चों सहित सभी यात्रियों को यात्रा के लिए आगे रवाना कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि सभी बच्चों ने दोपहर में ट्रेन की पैंट्रीकार से खाना खाया था। खाना खाने के करीब 4 घंटे बाद उन्हें उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते 3० में से 5 बच्चों की हालत गंभीर हो गई। इसके बाद शुक्रवार रात करीब 9.2० बजे बच्चों के उपचार के लिए ट्रेन खंडवा स्टेशन पर रोकी गई।



