लड़ाई का 32वां दिन: और विध्वंसक होता जा रहा पश्चिम एशिया जंग

अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, पूरा खाड़ी क्षेत्र दहला

इजरायल के मिसाइल हमले के बाद तेहरान में बिजली गुल
सऊदी में भी ईरान ने दागा ड्रोन
लेबनान में इजरायल केचार सैनिकों की मौत
ईरान का इजरायल पर बड़ा साइबर अटैक, सिक्योरिटी कैमरे और 50 कंपनियों का डाटा किया हैक
इजरायल के हमले में ईरान के 11 लोगों की मौत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ीं जंग का आज 32वां दिन है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को ईरान दो बार मारने की कोशिश कर चुका है। इसबीच ईरान व अमरिका दोनों पीछे नहीं हट रहे है।
अमेरिका ने मंगलवार को ईरान में बंकर हमले में भारी तबाही मचाई । वहीं ईरान ने भी खाड़ी देशों व इजरायल में जवाबी हमले में कई तेल क्षेत्रों को मिसाइलों से तमहस-नहस कर दिया है। ईरान की न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कल रात (30 मार्च) को मरकजी प्रांत के महल्लात शहर पर हुए हमले में 11 लोग मारे गए और 15 अन्य घायल हो गए।एजेंसी ने बताया कि महल्लात शहर में तीन आवासीय इकाइयों पर सीधे गोले दागे गए, जिससे भारी नुकसान हुआ। इसी क्रम में ईरान ने सऊदी के अल-खारज प्रांत ड्रोन दागा है, जिसे सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। सऊदी के अल-खारज प्रांत ने बताया कि ड्रोन के दुर्घटनाग्रस्त होने से गिरे मलबे के कारण छह घरों को मामूली नुकसान हुआ है। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। ईरान ने इजरायल पर जोरदार हमला किया है। ईरान द्वारा किए इस हमले की इजरायली सैनिकों ने पुष्टि की है। इजरायल की राजधानी यरुशलम के ऊपर कम से कम 10 जगहों पर धमाके की आवाज सुनी गई है। इजरायल की सुरक्षाबलों का कहना है कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी मिसाइलों का जवाब दे रहा है, फिलहाल यरुशलम में सायरन बज रहे हैं। इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में अभियानों के दौरान चार इजरायली सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। आईडीएफ ने यह भी कहा कि तीन सैनिक घायल हुए हैं।

ईरान सेना ने गिराया अमेरिका की एमक्यू-9 रीपर ड्रोन

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने मंगलवार को बताया कि ईरान की वायु सेना ने सेंट्रल ईरान के इस्फहान शहर के ऊपर अमेरिकी निर्मित एमक्यू-9 रीपर लंबी दूरी के ड्रोन को मार गिराया है।

सऊदी अरब ने इंटरसेप्ट किए 10 ड्रोन

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक बीते कुछ घंटों में उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने 10 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में चलाए जा रहे सुरक्षा ऑपरेशनों के बीच यह कार्रवाई की गई और सभी हवाई खतरों को समय रहते खत्म कर दिया गया।

दुबई में कुवैत तेल टैंकर पर किया हमला

कुवैत की सरकारी तेल कंपनी के हवाले से आधिकारिक समाचार एजेंसी ने बताया, संयुक्त अरब अमीरात के दुबई बंदरगाह के लंगरगाह क्षेत्र में मौजूद कुवैती के विशाल कच्चे तेल टैंकर पर ईरान ने जानबूझकर हमला किया। ईरानी हमले के कारण कुवैती तेल टैंकर में आग लग गई, हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ।

तेहरान में गुल हुई बिजली

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार को तेहरान में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और राजधानी के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई। इजरायल के इस मिसाइल इस हमले के दौरान तेहरान शहर के पूर्व में स्थित एक विद्युत सबस्टेशन पर बिजली के छर्रे गिर गए, जिसके कारण बिजली सप्लाई बंद हो गई।

बंकर बस्टर बमों से ईरान में तबाही

अमेरिकी सेना ने इस्फ़हान में स्थित गोला-बारूद डिपो पर 2,000 पाउंड (लगभग 907 किलोग्राम) के बंकर-भेदी बमों से हमला किया। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया, हमले में भारी मात्रा में बंकर-भेदी बमों का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को ईरान के इस्फ़हान में तडक़े हुए एक भीषण विस्फोट का वीडियो साझा किया। वीडियो में कई विस्फोट होते दिख रहे हैं, जिसके बाद आसमान में नारंगी रंग की तेज आग लग जाती है और धुएं के गुबार उठते हैं। हालांकि, ट्रम्प ने वीडियो के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन दृश्य में इस्फ़हान में एक गोला-बारूद डिपो पर अमेरिकी-इजरायल हमले को दर्शाया गया है। इस्फ़हान 23 लाख लोगों का शहर है और यहीं ईरान का बदर सैन्य हवाई अड्डा भी स्थित है। रिपोर्टों के अनुसार, हमले के कारण कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में आग के ऊंचे-ऊंचे गोले और झटके महसूस किए गए। इस हमले ने युद्ध के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही तनाव बढऩे की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है, जबकि पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की राजनयिक समाधान खोजने के लिए बैठक कर रहे हैं।

होर्मुज पर नेतन्याहू ने सुझाया स्थाई समाधान ऊर्जा पाइपलाइनों का रास्ता बदलना चाहिए

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा पाइपलाइनों का रास्ता बदलना चाहिए। नेतन्याहू के अनुसार, इन पाइपलाइनों को सऊदी अरब के रास्ते लाल सागर और भूमध्य सागर की तरफ ले जाना एक स्थायी समाधान हो सकता है। नेतन्याहू ने न्यूजमैक्स के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के पास है। इस वजह से ईरान जब चाहे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि सैन्य समाधान केवल कुछ समय के लिए स्थिरता दे सकता है। लेकिन अगर पाइपलाइनों का रास्ता बदल दिया जाए, तो ईरान की रणनीतिक ताकत कम हो जाएगी। नेतन्याहू का मानना है कि जमीन के रास्ते नए पाइपलाइन नेटवर्क बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान का दबदबा खत्म होगा।

होर्मुज पर ईरान की नई नीति

इस बीच, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना को मंजूरी दे दी है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (टोल) लगाएगा। यह टैक्स ईरान की मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। इस योजना में जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण की रक्षा और वित्तीय इंतजामों के कड़े नियम शामिल हैं। ईरान की इस नई योजना में साफ कहा गया है कि अमेरिका और इस्राइल के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, उन देशों के जहाजों पर भी रोक रहेगी जो ईरान पर एकतरफा पाबंदियां लगाते हैं। ईरान इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता और सेना की भूमिका को मजबूत कर रहा है। इसके लिए वह ओमान के साथ मिलकर कानूनी ढांचा तैयार करने पर भी काम कर रहा है।

होर्मुज ट्रंप की गले की हड्डी बना

ये होर्मुज न हुआ जी का जंजाल हो गया, ये वो हड्डी बन गया है, जो ट्रंप के गले से न निगलते बन रही है और न ही उगलते, इजरायल और अमेरिका संग चल रही ईरान की जंग की वजह से तेल के जहाज होर्मुज पार नहीं कर पा रहे हैं, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल महंगा होने से अमेरिका के लोग भी गुस्से में हैं। ट्रंप ने पहले ईरान को धमकी दी कि अगर वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलेगा तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और तेल के कुओं को उड़ा देगा। फिर अगले ही पल वह कहने लगे कि होर्मुज खोले बिना ही वह जंग खत्म करने को तैयार हैं। दुनिया को ये समय ही नहीं आ रहा कि ट्रंप आखिर चाहते क्या हैं।

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