पितरों को समर्पित मौनी अमावस्या: जानिए स्नान-दान और मौन व्रत की परंपरा

मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान-दान और मौन व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान-दान और मौन व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं और मौन व्रत का पालन करते हैं।

मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए तर्पण और पिंडदान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति के लिए कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं।

हिंदू धर्म में 12 अमावस्या की तिथियां पड़ती हैं. माघ माह में माघी अमावस्या पड़ती है. इसे मौनी अमावस्या भी कहा जाता है. ये अमावस्या सभी अमावस्या में अति विशेष मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन गंगाजल अमृत के समान हो जाता है. यही कारण है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के माघ मेले में गंगा और संगम के तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं और साधु संतों की भारी भीड़ उमड़ती है.

मौनी अमावस्या के दिन स्नान-दान और मौन व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन इन कामों को करने से अक्षय पुण्य मिलता है. वहीं अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित है. इस दिन पितरों को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है. इसके साथ ही कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं. आइए इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

मौनी अमावस्या कब है? (Mauni Amavasya 2026 Kab Hai)
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 जनवरी को रात 12 बजकर 03 मिनट पर शुरू होगी. ये तिथि 19 जनवरी 2026 की रात 01 बजकर 21 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को यानी की कल मनाई जाने वाली है. कल ही इसका स्नान-दान और व्रत किया जाएगा.

मौनी अमावस्या के उपाय (Mauni Amavasya Ke Upay)
मौनी अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करें. इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है. इस दिन
जल में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें. क्योंकि ये दिशा पितरों की मानी जाती है.
माना जाता है कि अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष पर पितरों का वास होता है, इसलिए मौनी अमावस्या के दिन
जल के काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ को चढ़ाएं. फिर 108 परिक्रमा करें. इससे पितरों का आशीर्वाद बना रहता है. मौनी अमावस्या के दिन दान बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इस दिन अपनी क्षमता अनुसार कंबल, अनाज, गर्म वस्त्र या जरूरतमंदों को भोजन का दान करें. इस दिन किसी मंदिर या पीपल के नीचे दीपदान करें. साथ ही चींटियों को आटा या चीनी खिलाएं. इससे भी पितृ प्रसन्न होते हैं.

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