तेहरान में चीन के दो रहस्यमयी विमान, खामेनेई ने ट्रंप को लताड़ा; ट्रंप का पलटवार, कहा सत्ता बदल कर रहेंगे

ईरान- अमेरिका के बीच छंट चुके युद्ध के बादल अचानक फिर उमड़ने शुरु हो चुके हैं। बड़ी खबर निकल कर सामने आई है कि जैसे चीन के दो रहस्यमयी बोईंग हवाई जहाज तेहरान में उतरे हैं, इसके बाद अचानक फिर तेहरान के तेवर बदल चुके हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ईरान- अमेरिका के बीच छंट चुके युद्ध के बादल अचानक फिर उमड़ने शुरु हो चुके हैं। बड़ी खबर निकल कर सामने आई है कि जैसे चीन के दो रहस्यमयी बोईंग हवाई जहाज तेहरान में उतरे हैं, इसके बाद अचानक फिर तेहरान के तेवर बदल चुके हैं।

एक ओर जहां भरे मंच से ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह खामेनेई ने ईरान में हुई मौतें के लिए सीधे तौर पर ट्रंप को जिम्मेदार बताया है तो वहीं दूसरी ओर ट्रंप भी भड़क उठे हैं और पहली बार ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का नाम लेकर उन्हें सत्ता से बेदखल करने का दावा पेश किया है। हालांकि इसके बाद एक बार फिर से जंग के आसार दिखने लगे हैं और मिडिल ईस्ट में हलचल बढ़ गई। चीन से कौन से दो रहस्मयी विमान तेहरान में उतरे हैं और कैसे इसके बाद अचानक अली खामेनेई ने खुला चैलेंज दे दिया है।

पिछले 15 दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच में काफी तनातनी चल रही है और तीन दिन पहले तक हालात इतने खराब हो गए थे कि दावा सामने आया था कि ईरान ने अमेरिका पर अटैैक का मन बना लिया था लेकिन इस बीच ईरान के विदेश मंत्री वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सहयोगी देशों ने ट्रंप से संयम बरतने की अपील की, वहीं ईरान ने भी आखिरी समय पर एक अहम रियायत दी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ को एक टेक्स्ट मैसेज भेजकर बताया कि करीब 800 लोगों को फांसी देने की योजना रोक दी गई है। इस संदेश को ईरान की ओर से तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। इसके बाद व्हाइट हाउस में माहौल बदला और ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई फिलहाल टालने का फैसला किया।

हालांकि ये बात सच है कि ईरान में इकोनॉमिक संकट के बाद जो हालात पैदा हुए, उसमें अमेरिका और ट्रंप का बड़ा योगदान है। क्योंकि एक ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाता ईरान सरकार का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों को मदद दिलाने, मदद भेजने और ईरान की खामेनेई सरकार के खिलाफ अपनी सेना उतारने का ऐलान किया, और इससे ईरान में विद्रोहियों को बल मिला। हालांकि अभी तक ट्रंप के सारे दावे झूठे ही साबित हुए बल्कि ईरान में प्रदर्शकारियों ने सीधे ईरान की सेना से पंगा ले लिया और अब तक ईरान में भयंकर विरोध में तीन हजार के ज्यादा लोगों के मरने की खबरें आई है। तीन हजार मौतें कोई आम बात नहीं है बल्कि ये किसी जंगी हालात से बड़ा हादसा है। लेकिन जब ईरान ने 800 फांसी को रोके जाने के दावा ट्रंप के सामने पेश किया था तो इसके बाद हालात कुछ बेहतर हो गए थे।

खुद ट्रंप ने ईरान पर अटैक न करने का ऐलान किया था। दावा यह भी किया जा रहा है कि ट्रंप ने ये ऐलान ईरान के विदेश मंत्री के दावों के बाद नहीं किया था बल्कि इसमें पूरा गेम इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर इजराइल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे हस्तक्षेप करते हुए हमला न करने की अपील की। नेतन्याहू ने साफ तौर पर कहा कि वह ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई झेलने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, खासकर तब जब मजबूत अमेरिकी सैन्य समर्थन मौके पर मौजूद नहीं हो। सूत्रों के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को फोन कर संयम बरतने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में हमला करने से इजराइल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसके अलावा मिडिल ईस्ट में खुद अमेरिका कमजोर हालात में था क्योंकि ईरान से लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन अमेरिका के पास मिडिल ईस्ट में नहीं थे। यही वजह थी कि दक्षिणी चीन में तैनात अमेरिका का यूएसएस पोत अचानक ईरान के करीब जा खड़ा हुआ था तो दूसरी ओर अल उदैद एयरबस पर भी कई बड़े अमेरिकी सैन्य फाइटर, बोईंग जेट समेत कई पहुंच चुके है लेकिन इस सबके बीच ईरान ने भी अपनी तैयारियां जारी रखी हैं। पिछले दिनों जब जंग के आसार बढ़ गए थे और ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था तो उसी दौरान चीन के दो रहस्यमई विमान अचानक तेहरान पहुंचे थे। जैसे इंटरनेशनल फ्लाइट डाइवर्ट और रडार स्क्रीन सूचना आई कि दो विमान ईरान के एयर स्पेस में उड़ान भरकर दाखिल हो चुके हैं। इजराइल के सभी एयरबेस हाई अलर्ट पर हो गए आयरन डोम डेविड स्लिंग एरो सिस्टम एक्टिव हो इजरयली एयरफोर्स पूरी तरह से स्टैंड बाय हो गई।उधर क़तर कुवैत और अल उदैद बेस से अमेरिकी ड्रोन और सर्विलांस ट्रेन एक्टिव हो गए। सबको लगने लगा ईरान अब फ्री एमटी स्ट्राइक करने जा रहा है। लेकिन यह विमान ईरान के महान एयर के थे और इन विमानों ने उड़ान भरी थी दक्षिणी चीन से एक गोंगझऊ से। दूसरा शियान इलाके से।

अब सवाल उठता है कि जब एरोस्पेस बंद है तो यह दो विमान कैसे अंदर आए? दरअसल अमेरिका पहले से दावा करता रहा है कि महान एयर का इस्तेमाल आईआरजीसी के लिए हथियार, मिसाइल, कैश और मिलिट्री इक्विपमेंट ट्रांसपोर्ट के लिए होता है। यानी यह कोई साधारण कमर्शियल फ्लाइट नहीं मानी जाती है। चीन ने पहले ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दिया था लेकिन मिसाइल्स नहीं। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन ने उसी सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइल्स भेज दी हैं जो सीधे इस्तेमाल एफ-35 और एफ-16 क्रूज मिसाइल और ड्रोन अटैक रोकने में मदद करते है।

चीन से आए ये दोनों कार्गाे विमान उतरे हैं तो ईरान एक बार फिर से अपने पुराने तेवर में आ चुका है। इन विमानों के उतरने के महज 2 घंटे बाद खामेनेई का बयान आता है। यह टाइमिंग महज इत्तेफाक नहीं है। यह ट्रंप के लिए एक सीधा संदेश है कि ईरान अब अकेला नहीं है। अयातुल्ला खामेनेई ने अपने संबोधन में ट्रंप पर जो आरोप लगाए हैं, वो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचाने वाले हैं। उन्होंने कहा, कि ट्रंप एक ऐसे इंसान हैं जिनके हाथ बेगुनाह ईरानियों के खून से रंगे हैं। खामेनेई ने साफ कहा कि ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंध दवाओं की कमी और आर्थिक बदहाली के लिए सिर्फ और सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां जिम्मेदार हैं। ट्रंप ने ईरान के साथ हुई परमाणु डील को तोड़कर न केवल विश्वासघात किया, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को आग में झोंक दिया। खामेनेई का तर्क है कि ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी का मकसद ईरान के आम नागरिकों को भूखा मारना है ताकि वो अपनी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएं। लेकिन चीन के विमानों के आने से यह साफ हो गया है कि ट्रंप की यह घेराबंदी अब नाकाम हो रही है।

एक ओर जहां चीन से मदद मिलते ही तेहरान के तेवर बदले हैं तो दूसरी ओर व्हाइट हाउस भी का नजरिया पूरी तरह से बदल गया है। ट्रंप एक बार फिर से तेहरान के खिलाफ एक्टिव हुए हैं और इस बार उन्होंने सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का नाम लेकर उनके खिलाफ बयान जारी किया है ट्रंप ने कहा कि – खामेनेई को समझ लेना चाहिए कि उनकी धमकियों का वक्त खत्म हो चुका है। हम अब सिर्फ प्रतिबंध नहीं लगाएंगे, बल्कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ईरान में यह दमनकारी सत्ता ही न रहे। यह पहली बार है जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से रिजाइम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन की बात की है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से एक बहुत बड़ा और खतरनाक बयान है। सवाल यह है कि ट्रंप की ये तानाशाही सोच क्या दुनिया को एक और युद्ध में नहीं धकेल देगी?

अब सवाल उठता है कि क्या वाकई युद्ध होगा? अगर ट्रंप सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। ईरान के पास हिजबुल्लाहश् और हुती जैसे सहयोगियों का नेटवर्क है जो पूरे इजरायल और सऊदी अरब को निशाना बना सकते हैं। ट्रंप को लगता है कि वो एक ट्वीट से सरकारें बदल सकते हैं, लेकिन ईरान कोई छोटा देश नहीं है। यह एक प्राचीन सभ्यता है और उनके पास दुनिया की सबसे बड़ी मिसाइल फोर्स में से एक है। ट्रंप की एक छोटी सी गलती पूरी दुनिया में तेल की कीमतों को 200 डॉलर के पार पहुंचा सकती है और इंटरनेशनल इकोनॉमी को तबाह कर सकती हैं।

ऐसे में साफ है कि तेहरान में उतरे चीन के विमान सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत हैं। एक ऐसा युग जहाँ अमेरिका की दादागिरी को चुनौती मिल रही है। खामेनेई का गुस्सा जायज हो सकता है, लेकिन ट्रंप की जिद खतरनाक है। ईरान में सत्ता बदलेगी या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन ट्रंप के इन फैसलों ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहाँ से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की ओर जाता है।

Related Articles

Back to top button