हिजाब वाली महिला बनेंगी बीएमसी की मेयर? शिंदे की गैरमौजूदगी और AIMIM के 8 पार्षद खेल सकते हैं बड़ा खेल

बीएमसी के फाइनल रिजल्ट आ चुका है। रुझानों में बीजेपी को बहुत बड़ी जीत का दावा कर रही गोदी मीडिया को देर रात में बड़ा झटका लग गया। जिस बीजेपी को अकेले बहुमत के दावे किए जा रहे थे,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कहावत है कि दूध से जली बिल्ली मट्ठा भी फूंक फूंक कर खाती है। कुछ ऐसा ही सीन महाराष्ट्र के बीएमसी चुनाव में दिखाई दे रहा है। भले से ही अपने सूटबूट वाले पीएम साहब मुंबई में बीजपी की जीत को काजीरंगा में सेलिब्रेट कर रहे हैं लेकिन अंदरखाने का सच यह है कि बीएमसी मेयर को लेकर भयंकर वाला पेंच फंस चुका है।

एक ओर जहां शिंदे साहब की हालत इतनी खराब है कि पार्षदों को होटल ताज में बंद कर चुके हैं तो दूसरी उद्धव ठाकरे से लेकर संजय राउत के बयाानों से हड़कंप मचा हुआ है लेकिन इस सबके बीच हिजाब वाली मुस्लिम पार्षद का कारपोरेटर से मेयर बनने का बयान वायरल हो गया है, जिससे हड़कंप मचा है।

बीएमसी के फाइनल रिजल्ट आ चुका है। रुझानों में बीजेपी को बहुत बड़ी जीत का दावा कर रही गोदी मीडिया को देर रात में बड़ा झटका लग गया। जिस बीजेपी को अकेले बहुमत के दावे किए जा रहे थे, उसको सिर्फ और सिर्फ 89 सीटें ही मिल सकीं और बीजेपी की हालत इतनी खराब हो गई कि उनको फिर से एकनाथ शिंदे के सहारे की बड़ी जरुरत आन पड़ी लेकिन शिंदे जोकि पहले से ही बीजेपी के क्रियाकलापों के पूरी तरह वाकिफ थे तो बीएमसी के मेयर के खेल में खुद को सेफ जोन में ले जाने की कोशिश करते हुए दिखाई दिए। पहले तो उन्होंने अपने सभी पार्षदों को होटल ताज में बैठक कर वहीं रोक दिया, शायद इस वजह से कि वो पार्षदों में टूट नहीं चाहते थे, क्योंकि उद्धव ठाकरे का सीधा बयान आ गया कि शिवसेना एक बार फिर से टूटने जा रही है, उनका इशाारा शिंदे गुट की ओर ही था। हालांकि एकनाथ शिंदे ने बड़ा गेम खेला और मेयर का पद सीधे बीजेपी को देने के बजाया ढाई-ढाई साल का एजेंडा चला दिया। खबर निकल कर सामने आई है कि शिंदे बीएमसी में मेयर पद को लेकर ढाई ढाई साल का समझौता चाहते हैं। हालांकि दावा सामने आया है कि जल्द ही एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस मिलकर तय कर लेंगे।

महायुति में जारी खींचतान के बीच शिवसेना यूबीटी के बयान ने राजनीति को गरमा दिया है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीएमसी चुनाव में हार के बाद कहा कि मुंबई में शिवसेना यूबीटी का महापौर बनते देखना उनका सपना बना हुआ है और अगर भगवान की कृपा हुई तो यह सपना अभी भी सच हो सकता है। हालांकि उन्होंने ये साफ नहीं किया कि ऐसा कैसे संभव है। शिवसेना यूबीटी के नेता सुनील प्रभु ने तर्क दिया है कि भाजपा की बीएमसी चुनाव में सफलता सिर्फ इसलिए मिली है क्योंकि शिवसेना एकजुट नहीं है। कांग्रेस के पूर्व नेता संजय झा ने भी कहा है कि अगर शिवसेना एकजुट होती तो बीएमसी चुनाव में भाजपा के जीतने की कोई संभावना नहीं थी।

अगर बीजेपी को मिली 89सीटों को छोड़ दिया जाए तो शिंदे गुट को मिलाकर कुल विपक्ष के पास 138 सीटें बचती है, इसमें अगर शिंदे गुट की 29 सीटों को हटा दिया जाए तो 109 सीटें विपक्ष के बाद पास बचती है। बस विपक्ष को अपना मेयर चुनने के लिए 5 पार्षदों की जरुरत है,सिफ्र पांच पार्षद ही पूरे बीएमसी के चुनाव को पलट सकते हैं। अब सवाल यह है कि उद्धव ठाकरे जो दावा कर रहे हैं कि कि उनका मेयर हो सकता है तो क्या वो पांच पार्षद तोड़कर लाने वाले हैं। क्या शिंदे ने अचानक अपने पार्षद इसी वजह से होटल ताज में कैद किए हैं ताकि वो उद्धव गुट से अपने पार्षदों को सुरक्षित रख सके या फिर शिंदे ने इस वजह से अपने पार्षदों को होटल ताज पहुंचाया है ताकि वो बीजेपी से ढाई-ढाई साल वाला सौदा कर सकें। हालांकि इस पूरे मामले पर संजय राउत का बहुत साफ बयान आया है। उन्होंने संपर्क में होने की बात कही है, साथ ही फडणवीस सरकार पर हमला बोला है कि उनको बंदी बनाएग गए पार्षदों को बाहर निकाला जाना चाहिए।

संजय राउत का साफ साफ कहना है कि संभावना बहुत कुछ है लेकिन कुछ कह पाना मुश्किल है लेकिन जिस तहर से उद्धव ठाकरे को बयान है और जिस तरह से संजय राउत का बयान है, उसमें ये बात कहीं न कहीं साबित होती दिख रही है कि शिवसेना यूटीबी बडा खेल कर सकती है। और पहले ही यूटीबी ने साफ किया है कि मराठी मानुष ही बीएमसी का मेयर होगा, लेकिन इस बीच बडा सवाल यह कि आखिर कैसे। आठ से ज्यादा पार्षद एआईएमआईएम के है और एआईएमआईएम पहले से ही मुंबई महापालिका पर हिजाब वाली मुस्लिम महिला के मेयर दावा है था और फिर से ये बयान एक हिजाब वाली मुस्लिम महिला का ट्रेंड होने लगा है जो कारपेारेटर से मेयर बनने का दावा पेश कर रही हैं।

मुस्लिम पार्षद महजीबन खान का मानना है कि मुस्लिम कारपोरेटर के मेयर होने की संभानना हैं। पूरे विपक्ष के पास सिर्फ 5 सीटें कम हैं और जिस तरह से बीजेपी और शिंदे के बीच खींचातानी चल रही है और शिंदे के पार्षदों ने न सिर्फ बीजेपी की नजर बल्कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत के बयान जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं वो एकनाथ शिंदे के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि मुंबई में उद्धव ठाकरे का जलवा है। वैसे भी पिछले पांच सालों में महराष्ट्र की राजनीति मे तोड़फोड़ की राजनीति खूब चली है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना को पूरी तरह से तोड़ दिया गया। पीएम साहब के चाणक्य जी ने सिर्फ शिवसेना ही नहीं तोड़ी बल्कि उद्धव ठाकरे का चुनाव निशान और कार्यकर्ताओं तक को दो भागों में बांट दिया। हालांकि अब उद्धव ठाकरे गुट इस सदमे से उभर चुका है और खुद को बीएमसी चुनाव में बहुत हद तक साबित किया है।

हालांकि अगर इंडिया गठबंधन पिछले बार की तरह इस बार चुनाव में एकजुट होकर लड़ी होती तो एक बात पूरी तरह से साफ थी कि बीएमसी चुनाव में इस बार भी मेयर शिवसेना उद्धव गुट का होता लेकिन अब अगर उद्धव ठाकरे को अपना मेयर चाहिए तो इसके लिए उनको अपना बीजेपी से पुराना हिसाब किताब चुकता करना होगा यानि कि कोई बड़ा सेंधमारी वाला गेम करना होगा। हालांकि फिलहाल जिस तरह से एक नाथ शिंदे अपने पार्षदों को होटल ताज में बंद करवा चुके हैं, ऐसे में यह संभव होता नहीं दिख रहा है। हालांकि ये पॉलिटिक्स है, यहां कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

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