संभल कोर्ट के जज के ट्रांसफर से मचा हड़कंप, अनुज चौधरी को बचाने की कोशिश!

संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने बीते  9 जनवरी एक अहम फैसला सुनाया था। 

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में न्याय की उम्मीद करना दिन बा दिन व्यर्थ होता जा रहा है। आज इस बीजेपी सरकार में न सिर्फ नेताओं की मनमानी देखने को मिलती है बल्कि वर्दी का रौब दिखाकर यूपी पुलिस द्वारा बेगुनाहों को मारना भी आम सा हो गया है।

आलम ये है कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और सरकार उन्हें सह दे रही है। पुलिस अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि अपराध कम करने के नाम पर या यूँ कह लें कि खुद को रोबिन हुड दिखाने के चक्कर में  बेगुनाहों पर ही जुल्म कर रहे हैं। अब ऐसे में सरकारी सह के दम पर अगर कहीं मामला कोर्ट में चला जाए और जज अपना फर्ज निभाकर ऐसे पुलिसवालों के खिलाफ आर्डर दे दे तो उसका रातों-रात ट्रांसफर कर दिया जाता है। बिलकुल सही सुना आपने ऐसा ही कुछ हुआ यूपी के संभल में। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई हिंसा का मामला काफी चर्चा में रहा.

यह हिंसा तब हुई जब शाही जामा मस्जिद के सर्वे का कोर्ट ने आदेश दिया था। इस सर्वे के दौरान कुछ लोग विरोध करने लगे और पुलिस के साथ झड़प हो गई। इस झड़प में कई लोग घायल हुए थे। अब इस मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने बीते  9 जनवरी एक अहम फैसला सुनाया था।  एक घायल युवक मोहम्मद आलम के पिता यामीन ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना वजह फायरिंग की, जिससे उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया।

CJM विभांशु सुधीर ने याचिका पर सुनवाई के बाद एएसपी अनुज चौधरी जो उस समय संभल के सीओ थे, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 15 से 20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट में कुछ संदेह है और मेडिकल रिपोर्ट्स से मिलान करने पर पुलिस फायरिंग की बात साफ दिखती है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करें।लेकिन पुलिस ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। संभल के एसपी ने कहा कि यह आदेश गलत है और वे हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।

इस फैसले से काफी विवाद हुआ क्योंकि अनुज चौधरी एक चर्चित और प्रभावशाली पुलिस अधिकारी हैं।अब इसी CJM विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को 14 जजों के तबादले का आदेश जारी किया। इसमें विभांशु सुधीर का नाम भी है। उन्हें संभल से हटाकर सुल्तानपुर में सीनियर सिविल जज के पद पर भेज दिया गया है। उनकी जगह आदित्य सिंह को संभल का नया CJM बनाया गया है। आदित्य सिंह वही जज हैं जिन्होंने पहले मस्जिद सर्वे का आदेश दिया था।यह तबादला CJM के फैसले के महज 10-12 दिन बाद हुआ है, इसलिए लोग इसे लेकर काफी सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह सामान्य तबादला है, जो जजों के बीच रूटीन में होता रहता है। लेकिन कई लोग मानते हैं कि यह पुलिस पर एफआईआर के आदेश के कारण हुआ है।

सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हो रही है। संभल हिंसा का मामला पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील था। चार लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। सरकार ने जांच कमेटी बनाई थी, लेकिन कोर्ट के आदेश ने नई बहस छेड़ दी। अब CJM का तबादला होने से यह मामला और भी गर्म हो गया है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि नया CJM इस मामले में क्या फैसला लेगा।

हालांकि ऐसे समय में ये फैसला आना न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है बल्कि बीजेपी सरकार को भी कड़घरे में ला चुका है। सूबे के सीएम कानून व्यवस्था को लेकर बड़े बड़े दावे करते हैं लेकिन इन दावों की पोल खुल चुकी हैं और बीजेपी सरकार पूरी तरह से एक्सपोज हो चुकी है.

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