निर्मला सीतारमण का बजट फेल? चिदंबरम का तीखा हमला, आर्थिक रणनीति पर सवाल

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट पर सियासत तेज हो गई है... पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट को...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में आम बजट पेश किया.. केंद्र सरकार जहां बजट की सराहना कर रही है.. तो वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे निराशाजनक करार देते हुए इसकी आलोचना की.. कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने बजट को लेकर सवाल खड़े किए हैं.. और उन्होंने कहा कि जिसने भी आज बजट को सुना होगा वो हैरान रह गया होगा.. बता दें कि बजट के बाद कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस.. जिसमें पी.चिदंबरम और जयराम रमेश मौजूद थे.. इस दौरान चिदंबरम ने बजट को आर्थिक रणनीति और नेतृत्व दोनों के स्तर पर विफल करार दिया.. और उन्होंने कहा कि बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता.. मौजूदा परिस्थितियों में बजट भाषण को उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए.. जिनका ज़िक्र कुछ दिन पहले जारी किए गए.. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया था..

आपको बता दें कि 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया.. यह बजट भारत को विकसित भारत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की रणनीति को आगे बढ़ाने का दावा करता है.. सरकार ने इसे आर्थिक स्थिरता, पूंजीगत निवेश में वृद्धि और युवा शक्ति पर केंद्रित बताया है.. बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर बनाए रखने (2025-26 के संशोधित अनुमान के अनुसार).. और 2026-27 में इसे 4.3 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है.. पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की गई है.. जो पिछले वर्ष के 11.2 लाख करोड़ से अधिक है.. सरकार का कहना है कि यह निवेश बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा..

हालांकि, बजट पेश होने के तुरंत बाद विपक्षी दलों.. खासकर कांग्रेस ने इसकी कड़ी आलोचना की.. कांग्रेस नेताओं ने इसे निराशाजनक और आर्थिक चुनौतियों से मुंह मोड़ने वाला बताया.. पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट को आर्थिक रणनीति और नेतृत्व दोनों स्तरों पर विफल करार दिया.. और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बजट केवल राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता.. बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रमुख चुनौतियों पर स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए.. चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या सरकार और वित्त मंत्री ने कुछ दिन पहले जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को पढ़ा भी है या नहीं.. उनके अनुसार, सर्वेक्षण में बताई गई चुनौतियों को बजट में पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है..

जानकारी के अनुसार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के सामने कई गंभीर बाहरी.. और आंतरिक चुनौतियां उजागर की गई हैं.. इनमें अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ शामिल हैं.. जिन्होंने निर्यातकों और निर्माताओं पर दबाव बढ़ाया है.. वैश्विक व्यापारिक संघर्ष लंबे समय से चल रहे हैं.. जो निवेश को प्रभावित कर रहे हैं.. जिससे व्यापार चीन के साथ घाटा बढ़ रहा है.. सर्वेक्षण में सकल स्थिर पूंजी निर्माण के कम स्तर (लगभग 30 प्रतिशत).. और निजी क्षेत्र की निवेश में हिचकिचाहट का जिक्र है..

वहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह में अनिश्चितता है.. और पिछले महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का बाहर जाना जारी है.. राजकोषीय समेकन की धीमी गति, ऊंचा राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा भी चिंता का विषय है.. मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़ों और वास्तविक घरेलू खर्च में अंतर बना हुआ है.. लाखों एमएसएमई बंद हो चुके हैं.. और बचे हुए संघर्ष कर रहे हैं.. युवाओं में बेरोजगारी की स्थिति अस्थिर है.. और शहरीकरण के साथ बुनियादी ढांचा बिगड़ रहा है..

चिदंबरम ने कहा कि बजट भाषण में इनमें से किसी भी मुद्दे को ठीक से संबोधित नहीं किया गया.. और उन्होंने कम से कम 10 प्रमुख चुनौतियों की सूची गिनाई.. जो आर्थिक सर्वेक्षण और विशेषज्ञों द्वारा चिन्हित की गई थीं.. पहली चुनौती अमेरिकी दंडात्मक टैरिफ है.. जो निर्यातकों पर बोझ डाल रही है.. दूसरी लंबे व्यापारिक संघर्ष हैं.. जो निवेश को प्रभावित कर रहे हैं.. और तीसरा चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा है..

वहीं चौथी कम पूंजी निर्माण और निजी निवेश में कमी.. पांचवीं FDI और FPI की अनिश्चितता.. छठी राजकोषीय समेकन की धीमी गति.. सातवीं मुद्रास्फीति और वास्तविक खर्च में अंतर.. आठवीं एमएसएमई का संकट.. नौवीं युवा बेरोजगारी.. और दसवीं शहरी बुनियादी ढांचे का बिगड़ना है.. बता दें कि पी चिदंबरम ने कहा कि इन पर चर्चा न होने से लोकसभा में तालियां औपचारिक-सी थी.. और श्रोता जल्दी ध्यान हटाने लगे..

आपको बता दें कि चिदंबरम ने बजट के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए.. उन्होंने कहा कि 2025-26 के संशोधित अनुमानों में राजस्व प्राप्तियां 78,086 करोड़ रुपये कम रहीं.. कुल व्यय 1 लाख 503 करोड़ कम रहा.. राजस्व व्यय 75 हजार 168 करोड़ कम और पूंजीगत व्यय में 1 लाख 44 हजार 376 करोड़ की कटौती हुई.. जिसमें केंद्र का हिस्सा 25 हजार 335 करोड़ और राज्यों का 1 लाखा 19 हजार 41 करोड़ था.. केंद्र का पूंजीगत व्यय जीडीपी के 3.2 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत रह गया.. उन्होंने कहा कि इस दयनीय प्रदर्शन की कोई व्याख्या नहीं की गई.. महत्वपूर्ण सेक्टरों में कटौती हुई है.. बहुप्रचारित जल जीवन मिशन पर व्यय 67 हजार करोड़ से घटाकर मात्र 17 हजार करोड़ कर दिया गया.. यह कटौती ग्रामीण जल आपूर्ति के लक्ष्यों पर गहरा असर डाल सकती है..

राजकोषीय घाटे के बारे में चिदंबरम ने कहा कि कई महीनों के अभ्यास के बाद भी संशोधित अनुमान बजट अनुमान के अनुरूप 4.4 प्रतिशत पर टिका रहा.. 2026-27 में इसे मात्र 0.1 प्रतिशत घटाने का अनुमान है.. राजस्व घाटा 1.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा.. यह वित्तीय अनुशासन की दिशा में कोई साहसिक कदम नहीं है.. और उन्होंने बजट भाषण की सबसे बड़ी कमजोरी बताई कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों, संस्थानों, इनिशिएटिव्स, फंडों, समितियों.. और हब्स की संख्या बढ़ाने से थकती नहीं हैं.. उन्होंने कम से कम 24 ऐसी चीजों की गिनती की.. चिदंबरम ने पूछा कि इनमें से कितनी अगले साल तक भुला दी जाएंगी या गायब हो जाएंगी..

 

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