घर पर इन योगासनों के करने से घटेगी पेट की चर्बी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पेट की चर्बी बेहद जिद्दी होती है। ये एक बार आ जाए तो जाने का नाम नहीं लेती। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में कामकाज और थकान के बीच भारी-भरकम वर्कआउट कर पाना आसान नहीं होता है। लोगों का मानना है कि अगर पेट कम करना है तो पसीना बहाना होगा, हालांकि ये सभी मामलों में सच नहीं है। पेट की चर्बी कोई रातों-रात नहीं बढ़ती और न ही रातों-रात घटती है। लेकिन कुछ सरल योगासनों को अपनाकर पेट की चर्बी को पिघलाया जा सकता है। कुछ आसन पाचन में सुधार लाते हैं और शरीर को हल्का महसूस कराने में सहायक है। जिनके रोजाना 15 से 20 मिनट अभ्यास से पेट की चर्बी को कम किया जा सकता है, वो भी ज्यादा मेहनत या भारीभरकम वर्कआउट किए। आप सुबह खाली पेट 10-15 मिनट रोजाना अभ्यास करें। नए योगी हैं तो हर आसन 20-30 सेकंड तक करें। लगातार अभ्यास करने से तीन से चार हफ्तों में फर्क दिखने लगता है।

मार्जरी आसन

इस आसन को पोज कैट यानी बिल्ली और दूसरी बार काओ यानी गाय जैसी बनती है। इसलिए इसे कैट ऐंड काओ आसन कहते हैं। हिंदी में इसे मार्जरी आसन कहते हैं। इस आसन से रीढ़ लचीली होती है और पूरा शरीर रिलैक्स होता है। नियमित अभ्यास से पेट को अंदर खींचने की क्षमता बढ़ती है। यह आसन स्ट्रेस कम करता है, जो कि पेट की चर्बी का बड़ा कारण है। मार्जरी आसन के नियमित अभ्यास के लिए दोनों हाथों और घुटनों के बल शरीर को गाय की आकृति में लाएं। सांस भरते हुए सिर उठाएं। फिर सांस छोड़ते हुए पीठ ऊपर उठाएं।

भुजंगासन

भुजंगासन से पीठ मजबूत होती है और पेट का तनाव कम होता है। यह पेट की चर्बी कम करने में बेहद प्रभावी आसन है। साथ ही कमर और स्पाइन के लिए शक्तिशाली भी है। अभ्यास के लिए पेट के बल लेटें, हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और धीरे-धीरे छाती को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि अभ्यास के दौरान कमर पर झटका न दें, शरीर को सिर्फ उतना ही उठाएं जितना आराम से हो। किडनी से जुड़ी समस्याएं खानपान और लाइफस्टाइल के कारण भी हो सकती हैं। किडनी की पथरी की समस्या में भुजंगासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका नियमित रूप से अभ्यास करने से किडनी पर जोर पड़ता है और इससे किडनी में मौजूद विषाक्त पदार्थों को निकालने में भी फायदा मिलता है।

पवनमुक्तासन

यह आसन पाचन के लिए रामबाण है। गैस, ब्लोटिंग और कब्ज घटाता है और पेट की अंदरूनी चर्बी पर सीधा असर डालता है। इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटें, घुटनों को मोडक़र सीने से लगाएं, हाथों से पकडक़र 20-30 सेकंड तक गहरी सांस लें। पवनमुक्तासन का अभ्यास पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। और अगर पाचन सही रहता है तो चर्बी का जमाव कम होता है। इसके अलावाकमर दर्द, साइटिका, हृदय रोग, गठिया में भी यह आसन लाभकारी है। स्त्रियों के लिए गर्भाशय सम्बन्धी रोग में पावनमुक्तासन काफी फायदेमंद है। इस आसन से मेरूदंड और कमर के नीचे के हिस्से में मौजूद तनाव दूर होता है। पवनमुक्तासन करने में भी थोड़ी सावधानी जरूरी है। जिन लोगों को कमर दर्द की शिकायत हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

ताड़ासन

ताड़ासन योगासन की दुनिया का मूल स्वर है। इससे रीढ़ एक सीधी रेखा में आती है। पेट के आसपास की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव आता है और शरीर के संतुलन में सुधार होता है। इसके अभ्यास के लिए दोनों पैर मिलाकर खड़े हो जाएं। फिर हाथ ऊपर उठाएं, उंगलियां जोड़ें और पूरा शरीर आसमान की ओर खींचें। 30- 40 सेकंड इसी स्थिति में रहें। इससे कोर मसल्स एक्टिव होती हैं, शरीर की मुद्रा सुधरती है और पेट का फैलाव कम होता है। यह आसन शारीरिक और मानसिक संतुलन विकसित करता है। मांसपेशियों और स्नायु बंधों में खिंचाव उत्पन्न होने से बढ़ती हुई अस्थियां लंबी होती हैं, जिससे शरीर की लंबाई बढ़ती है। इसके अलावा, ताड़ासन मलाशय और आमाशय की मांसपेशियों और आंतों में खिंचाव उत्पन्न करता है, इसलिए प्रेगनेंसी के 6 माह तक उदर की मांसपेशियों और स्नायुओं को शक्ति प्रदान करने के लिए उपयोगी होता है।

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