UAE का पाकिस्तान पर दबाव, 17 अप्रैल तक पैसा लौटाने का दिया अल्टीमेटम
UAE ने पाकिस्तान पर बकाया रकम लौटाने के लिए सख्त रुख अपनाया है... रिपोर्ट्स के मुताबिक UAE ने 17 अप्रैल तक भुगतान करने...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पाकिस्तान इन दिनों दो मोर्चों पर जूझ रहा है.. एक तरफ उसकी अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज के बोझ तले दबी हुई है.. दूसरी तरफ वह मध्य पूर्व की जंग को रोकने के लिए मध्यस्थता का बड़ा काम कर रहा है.. संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को 2018 में दिए गए.. 2 अरब डॉलर के डिपॉजिट को हाल ही में दो महीने के लिए बढ़ा दिया है.. यह रोलओवर 17 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगा.. लेकिन कुछ खबरों में इसे तगड़ा झटका या पैसे लौटाओ की चेतावनी बताया गया है.. असल में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर जामिल अहमद ने साफ कहा है कि.. UAE कोई पैसा वापस नहीं मांग रहा है.. सिर्फ सालाना रोलओवर की बजाय अब मासिक रोलओवर हो रहा है.. यह पाकिस्तान को तुरंत IMF की समीक्षा पूरी करने का समय दे रहा है..
जानकारी के मुताबिक 2018 में UAE ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर का फाइनेंशियल सपोर्ट दिया था.. यह एक डिपॉजिट था.. यानी UAE का पैसा पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में रखा गया ताकि.. उसका विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहे.. शुरू में ब्याज दर 3 प्रतिशत थी.. जिसे बाद में बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया.. पाकिस्तान कई बार इस रकम को चुकाने में असमर्थ रहा.. इसलिए हर साल रोलओवर (एक्सटेंशन) मांगा जाता रहा.. और जनवरी 2026 में यह मैच्योर होने वाला था.. पाकिस्तान ने UAE से बात की और पहले एक महीने का.. फिर दो महीने का एक्सटेंशन मिल गया.. वहीं अब 17 अप्रैल तक यह व्यवस्था चलेगी.. UAE ने 6.5 प्रतिशत ब्याज ही बनाए रखा है.. पाकिस्तान लंबे समय यानी दो साल के रोलओवर.. और ब्याज को 3 प्रतिशत तक लाने की कोशिश कर रहा है..
जानकारी के अनुसार यह पैसा पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.. उसका विदेशी कर्ज बहुत ज्यादा है.. IMF से 7 अरब डॉलर का Extended Fund Facility प्रोग्राम चल रहा है.. तीसरी समीक्षा जारी है.. और चौथी किस्त के रूप में 1 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद है.. वहीं अगर UAE का यह 2 अरब डॉलर अचानक वापस चला जाता.. तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता.. फिलहाल SBP के पास करीब 16 अरब डॉलर का रिजर्व है.. UAE का यह सपोर्ट रिजर्व को स्थिर रखने में मदद करता है..
आपको बता दें कि डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री इशाक डार ने UAE के अधिकारियों से सीधे बात की.. और इस रोलओवर की पुष्टि की.. SBP गवर्नर ने नेशनल असेंबली की कमेटी को बताया कि UAE पैसे वापस नहीं मांग रहा.. बल्कि रोलओवर की शर्तों में बदलाव किया गया है.. यह पाकिस्तान के लिए राहत है.. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़ा हमला किया.. Operation Epic Fury के तहत ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए.. ईरान ने जवाब में अमेरिकी ठिकानों.. और इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए..
जानकारी के मुताबिक हिजबुल्लाह और हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप भी सक्रिय हो गए.. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की आशंका से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.. पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है.. इस जंग में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं.. और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं.. पाकिस्तान ने खुद को इस जंग में मध्यस्थ के रूप में पेश किया है.. उसका कहना है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है.. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों से संपर्क किया..
विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच सार्थक बातचीत होस्ट करने को तैयार है.. पाकिस्तान ने अमेरिका का 15-पॉइंट सीजफायर प्लान ईरान तक पहुंचाया.. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार 1 अप्रैल 2026 को पाकिस्तानी मध्यस्थों से बात की.. वेंस ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर के लिए तैयार हैं.. लेकिन कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी.. इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है..
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों के विदेश मंत्रियों को इस्लामाबाद बुलाकर बैठक की.. वह ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों.. और अमेरिका के साथ हालिया सुधार का फायदा उठा रहा है.. हालांकि, ईरान ने कुछ अमेरिकी मांगों को अत्यधिक और अव्यावहारिक बताया है.. इसके बावजूद पाकिस्तान कह रहा है कि.. बाधाओं के बावजूद प्रयास जारी रहेंगे.. आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने हाल ही में UAE का दौरा किया.. और वहां की लीडरशिप को पाकिस्तान की मध्यस्थता के बारे में जानकारी दी.. वहीं यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण था.. क्योंकि UAE खुद इस जंग में अमेरिका के पक्ष में खड़ा है..
जानकारी के अनुसार UAE का रुख जंग को जारी रखने का है.. गल्फ देश UAE और सऊदी अरब निजी तौर पर ट्रंप प्रशासन से कह रहे हैं कि ईरानी शासन को और कमजोर किया जाए.. UAE कथित तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है.. ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जबरन खोला जा सके.. ईरान ने UAE सहित कई गल्फ देशों पर हमले भी किए हैं.. UAE ने साफ कहा है कि वह अमेरिका का साथ देगा.. ऐसे में पाकिस्तान शांति चाहता है.. जबकि UAE जंग जारी रखने के पक्ष में दिख रहा है.. इसके बावजूद दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत बने हुए हैं..



