1 लाख दिरहम मुआवजा मामले में गोल्डन वीजा होल्डर की हार, एम्प्लॉयर के खिलाफ दावा खारिज

UAE में एक गोल्डन वीजा होल्डर को 1 लाख दिरहम के मुआवजे से जुड़े मामले में कानूनी झटका लगा है... एम्प्लॉयर के खिलाफ दायर दावा...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः यूएई में रहने वाले गोल्डन वीजा धारकों के लिए एक बड़ा मामला सामने आया है.. एक गोल्डन वीजा रखने वाले व्यक्ति को उस समय बड़ा झटका लगा.. जब अदालत ने उनके 1 लाख दिरहम के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया.. जानकारी के मुताबिक यह मामला एक कर्मचारी और उसके एम्प्लॉयर यानी कंपनी के बीच हुए विवाद से जुड़ा था.. कर्मचारी का दावा था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है.. और इसलिए उसे 1 लाख दिरहम का मुआवजा मिलना चाहिए.. लेकिन अदालत ने सभी दस्तावेजों.. और सबूतों की जांच करने के बाद इस दावे को स्वीकार नहीं किया..

आपको बता दें कि यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है.. क्योंकि संबंधित व्यक्ति के पास यूएई का गोल्डन वीजा था.. बहुत से लोगों का मानना है कि गोल्डन वीजा होने से हर तरह की कानूनी सुरक्षा अपने आप मिल जाती है.. लेकिन यह मामला दिखाता है कि अदालत हर मामले में केवल कानून और सबूतों के आधार पर फैसला करती है.. चाहे किसी व्यक्ति के पास गोल्डन वीजा हो या सामान्य रेजिडेंसी वीजा.. अदालत में फैसला हमेशा तथ्यों और प्रमाणों को देखकर ही दिया जाता है..

जानकारी के अनुसार कर्मचारी ने अदालत में दावा किया था कि उसे कंपनी की ओर से नुकसान पहुंचाया गया है.. और उसे 1 लाख दिरहम का मुआवजा मिलना चाहिए.. अदालत ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं.. कंपनी की ओर से भी अपने दस्तावेज.. और जवाब पेश किए गए.. इसके बाद अदालत ने उपलब्ध सबूतों की गहराई से जांच की.. जांच के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कर्मचारी अपने दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया.. इसी कारण अदालत ने मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया..

जिसको लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई की अदालतें किसी भी मामले में भावनाओं के आधार पर नहीं.. बल्कि लिखित दस्तावेज, रोजगार अनुबंध, वेतन रिकॉर्ड, ईमेल, आधिकारिक पत्र.. और अन्य प्रमाणों के आधार पर फैसला सुनाती हैं.. यदि कोई कर्मचारी मुआवजा मांगता है.. तो उसे यह साबित करना होता है कि उसे वास्तव में नुकसान हुआ है.. और उस नुकसान के लिए कंपनी जिम्मेदार है.. केवल आरोप लगाने से अदालत मुआवजा नहीं देती.. इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि.. गोल्डन वीजा होने का मतलब यह नहीं है कि श्रम कानूनों की सभी शर्तों से छूट मिल जाती है.. गोल्डन वीजा आपको लंबे समय तक यूएई में रहने की सुविधा देता है.. लेकिन नौकरी से जुड़े नियम पहले की तरह लागू रहते हैं..

वहीं अब बात करते हैं कि गोल्डन वीजा धारकों के लिए यूएई में क्या नियम हैं.. यदि किसी व्यक्ति के पास गोल्डन वीजा है.. और उसकी नौकरी चली जाती है या वह खुद इस्तीफा दे देता है.. तो उसकी रेजिडेंसी तुरंत समाप्त नहीं होती.. सामान्य वर्क वीजा की तुलना में यह एक बड़ा फायदा है.. सामान्य स्थिति में नौकरी खत्म होने पर रेजिडेंसी पर असर पड़ सकता है.. लेकिन गोल्डन वीजा धारकों को यह चिंता नहीं रहती.. वे यूएई में अपने वीजा की अवधि तक कानूनी रूप से रह सकते हैं..

हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे बिना किसी अनुमति के नई नौकरी शुरू कर सकते हैं.. यदि कोई गोल्डन वीजा धारक किसी कंपनी में नौकरी करना चाहता है.. तो उसे मानव संसाधन और अमीरात मंत्रालय यानी MoHRE से वैध वर्क परमिट लेना जरूरी होता है.. बिना वर्क परमिट के नौकरी करना यूएई के श्रम कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है.. यही कारण है कि कानूनी विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि.. नौकरी बदलते समय सभी सरकारी नियमों का पालन किया जाए.. नई कंपनी में शामिल होने से पहले आवश्यक वर्क परमिट.. और अन्य औपचारिकताएं पूरी करना बेहद जरूरी है..

अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों के अनुसार यदि कोई पेशेवर व्यक्ति रोजगार के आधार पर गोल्डन वीजा प्राप्त करना चाहता है.. तो उसकी मासिक सैलरी कम से कम 30 हजार दिरहम होनी चाहिए.. इसके अलावा, उसका पद ऑक्यूपेशनल लेवल 1 या ऑक्यूपेशनल लेवल 2 की श्रेणी में होना चाहिए.. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च कौशल वाले पेशेवरों को ही इस विशेष वीजा का लाभ मिले.. इन नियमों के कारण कई लोग अब अपनी नौकरी, वेतन.. और पद की जानकारी पहले से अधिक सावधानी से जांच रहे हैं.. यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता.. तो उसे गोल्डन वीजा मिलने में कठिनाई हो सकती है..

 

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