5 राज्यों के चुनाव से पहले पार्टियों की दौलत का हिसाब, BJP सबसे आगे तो कांग्रेस कितनी पीछे?

चुनावी जंग शुरू होने से पहले का माहौल देशभर में काफी दिलचस्प होने लगता है, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अगले साल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इस बीच यह जानना भी दिलचस्प है कि चुनावी मैदान में आने वाली पार्टियों के पास कितना पैसा है.

चुनावी जंग शुरू होने से पहले का माहौल देशभर में काफी दिलचस्प होने लगता है, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में अभी से ही राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर है.

पांचों राज्यों में होने वाले चुनाव के नतीजों पर तो लोगों के नजरें होती ही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा दिलचस्प माहौल उत्तर प्रदेश के लिए होता है. मौजूदा संकेतों के मुताबिक पांचों राज्यों में चुनाव फरवरी-मार्च 2027 के आसपास हो सकते हैं. जनगणना की समयसीमा और चुनावी तैयारियों को देखते हुए भी इसी अवधि की संभावना मजबूत हुई है.

चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा नजर उत्तर प्रदेश पर है, क्योंकि 403 सीटों वाला यह देश का सबसे बड़ा विधानसभा चुनाव होगा. इसके साथ पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, जबकि उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी बीजेपी, कांग्रेस और दूसरे दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं.

ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किस पार्टी के पास कितनी सीटें हैं, बल्कि यह भी है कि चुनाव लड़ने के लिए किस दल के पास कितना बड़ा आर्थिक आधार है और कौन पार्टी जमीनी स्तर पर कितनी तैयारी कर रही है. क्योंकि चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक स्थिति बेहतर होना भी काफी अहम है.

किस पार्टी के पास है सबसे ज्यादा पैसा?

केन्द्रीय चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी, क्रांग्रेस, बीएसपी और आम आदमी पार्टी में सबसे ज्यादा पैसा बीजेपी के पास है. साथ ही साथ यूपी की अगर बात की जाए, तो पार्टी की तरफ से चुनाव के लिए रोडमैप तैयार होना शुरू हो गया है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने अभी से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी अपने करीब 2.5 करोड़ प्राथमिक सदस्यों की बूथ के हिसाब से लिस्ट तैयार कर रही है, ताकि इनके जरिए घर-घर मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा सके.

किस पार्टी के पास कितना पैसा?

बीजेपी: करीब 7,627.2 करोड़ रुपये

बीएसपी: करीब 646 करोड़ रुपये

कांग्रेस: करीब 103 करोड़ रुपये

आम आदमी पार्टी: करीब 16 करोड़ रुपये

बीजेपी के पास है सबसे ज्यादा पैसा

केन्द्रीय चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के पास करीब 7,627.2 करोड़ रुपये, बीएसपी के पास 646 करोड़ रुपये, कांग्रेस के लिए 103 करोड़ रुपये, जबकि आम आदमी पार्टी के पास करीब 16 करोड़ रुपये का आंकड़ा दिया गया है. दूसरी तरफ, बीजेपी ने यूपी में संगठन, विकास कार्यों और बूथ स्तर की तैयारियों पर जोर बढ़ाया है. कांग्रेस भी संगठन मजबूत करने और सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे की तैयारी में है.

बीजेपी ने यूपी में बढ़ाई तैयारी

पांचों राज्यों में बीजेपी की नजर सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश पर है. यहां पार्टी सत्ता में है और 2027 में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने की कोशिश करेगी. हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन 100 विधानसभा क्षेत्रों पर खास ध्यान देना शुरू किया है जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था.

मई 2026 से मुख्यमंत्री राज्य के 75 में से 44 से ज्यादा जिलों का दौरा कर चुके हैं और करीब 38 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास कर चुके हैं. वहीं पंजाब की बात करें, तो पार्टी ने कार्यक्रमों की रुपरेखा भी बना ली है. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी पंजाब में 3 दिन रह सकते हैं, हालांकि उनका ये दौरा कब होगा उसकी जानकारी सामने नहीं आई है.

कांग्रेस के सामने संगठन-गठबंधन की चुनौती

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चर्चा तेज है. दोनों दल 2024 के लोकसभा चुनाव में साथ आकर बीजेपी को चुनौती दे चुके हैं और अब विधानसभा चुनाव में भी इसी तालमेल को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं. बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियां 2017 के फॉर्मूले को ध्यान में रखकर सीट बंटवारे पर विचार कर सकती हैं.

हालांकि, यूपी के अलावा उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने चुनावी तैयारी तेज कर दी है. पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को बीजेपी सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने और जनता के बीच सक्रिय रहने का संदेश दिया है. रोजगार, महंगाई, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को कांग्रेस अपने अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है.

बीएसपी की नजर यूपी के वोट बैंक पर

बहुजन समाज पार्टी के लिए सबसे अहम मैदान उत्तर प्रदेश है. मायावती की पार्टी का असर पहले के मुकाबले कम हुआ है, लेकिन दलित वोट बैंक में उसका आधार अब भी चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखता है.

यही वजह है कि बीजेपी समेत दूसरे दल बीएसपी के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रहे हैं. बीएसपी के लिए चुनौती यह है कि वह अपने पुराने सामाजिक आधार को दोबारा मजबूत करे और चुनावी मुकाबले में अपनी भूमिका बढ़ाए. यूपी के अलावा उत्तराखंड और दूसरे राज्यों में पार्टी की मौजूदगी है, लेकिन उसका मुख्य राजनीतिक फोकस यूपी ही रहने की संभावना है.

पंजाब में AAP की अग्निपरीक्षा

पंजाब में आम आदमी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने की है. 2022 में AAP ने पंजाब में शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन अब उसे पांच साल के कामकाज का हिसाब जनता के सामने रखना होगा. बीजेपी भी पंजाब में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

पार्टी हरियाणा की योजनाओं और महिला वोटरों से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों को पंजाब में जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रही है. AAP की नजर पंजाब के अलावा गोवा पर भी है. पार्टी गोवा में बड़े स्तर पर चुनावी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी में है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी पार्टी संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इन राज्यों में उसका मुकाबला स्थापित दलों से होगा.

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