प्रदूषण के कारण बच्चों की पढ़ाई को नुकसान, नई स्टडी में गुरुग्राम को लेकर चौंकाने वाला दावा

साल 2025 पर आधारित यह अध्ययन 5 से 18 साल की उम्र के बच्चों और किशोरों पर ट्रैफिक जनित प्रदूषण के प्रभाव को रेखांकित करता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ट्रैफिक से निकलने वाला धुआं न केवल बच्चों की सेहत, बल्कि उनकी पढ़ाई को भी प्रभावित कर रहा है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की एक स्टडी में दावा किया गया है कि गुरुग्राम में सड़क परिवहन से होने वाले प्रदूषण के कारण छात्रों के कुल 94,859 स्कूल-दिन बर्बाद हुए। साल 2025 पर आधारित यह अध्ययन 5 से 18 साल की उम्र के बच्चों और किशोरों पर ट्रैफिक जनित प्रदूषण के प्रभाव को रेखांकित करता है।

ट्रैफिक प्रदूषण से बच्चों की पढ़ाई पर असर

शहरों में बढ़ते वाहनों और उनसे निकलने वाले धुएं के कारण वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसका असर खासतौर पर बच्चों और किशोरों पर पड़ सकता है, क्योंकि उनका शारीरिक विकास जारी रहता है और प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से उनकी सेहत प्रभावित होने का खतरा रहता है।

ICCT की स्टडी के मुताबिक, गुरुग्राम में सड़क परिवहन से होने वाले प्रदूषण का असर बच्चों की शिक्षा पर भी दिखाई देता है। अध्ययन में 94,859 स्कूल-दिन प्रभावित होने का आंकड़ा सामने आया है। यह आंकड़ा बच्चों की पढ़ाई पर प्रदूषण के संभावित व्यापक प्रभाव की ओर ध्यान दिलाता है।

वाहनों से निकलने वाले धुएं में मौजूद प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से बच्चों में सांस संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।बच्चों की सेहत पर पड़ने वाला असर उनकी स्कूल में उपस्थिति और नियमित पढ़ाई को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में वायु प्रदूषण को केवल पर्यावरण की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दे के रूप में भी देखना जरूरी है।

ट्रैफिक प्रदूषण कम करना क्यों जरूरी?

गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में वाहनों की बढ़ती संख्या और सड़क परिवहन से होने वाला उत्सर्जन वायु गुणवत्ता के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण रखना और स्वच्छ परिवहन विकल्पों को अपनाना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। इसके साथ ही प्रदूषण के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने के लिए विश्वसनीय आंकड़ों और नियमित अध्ययनों की जरूरत है।

94,859 स्कूल-दिन का मतलब क्या है?

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की स्टडी रेखांकित करती है कि ट्रैफिक यानी गाड़ियों से निकलने वाले धुएं की वजह से स्कूली बच्चों के 94,859 स्कूल दिन बर्बाद हुए. इसमें 94,859 स्कूल दिन कैलेंडर पर आधारित है. ये प्रदूषण की वजह से स्कूल नहीं जा सके बच्चों के प्रभावित हुए कुल दिनों का योग है. ऐसे समझें तो स्टडी रेखांकित करती है कि प्रदूषण की वजह से 2025 में 431 बच्चे पूरे साल स्कूल नहीं जा सके.

अस्थमा के नए मामले भी सामने आए

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की स्टडी ये भी रेखांकित करती है कि गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से अस्थमा के 89 नए मामलों भी सामने आए हैं, जो अनुमान है. इस तरह साल 2025 में लगभग 4 दिन में एक नया अस्थमा का मामला सामने आने का अनुमान है. गाड़ियों से निकलने वाला धुएं सीाधे बच्चों के फेफड़ों पर असर डालता है. गौर हो कि हर दिन दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य हिस्सों से लगभग 5 लाख वाहन गुरुग्राम में आते हैं.

स्कूल आने-जाने तरीकों बदलाव

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की स्टडी में इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय की सिफारिश की गई है, जिसके तहत जीरो-एमिशन स्कूल बसें, दो-पहिया और तीन-पहिया वाहन, और जीरो-एमिशन वाहनों की ओर बड़े पैमाने पर बदलाव से प्रदूषण पर कुछ हद तक रोक लगाई जा सकती है. स्टडी ये भी कहती है किगुरुग्राम में रजिस्टर्ड हर वाहन को इलेक्ट्रिक बनाने से स्वास्थ्य से जुड़े संभावित फ़ायदों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा हासिल किया जा सकता है.

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