जेल में बंद MLA के समर्थन में AAP का बड़ा अभियान, घर-घर चलेगा हस्ताक्षर अभियान

आम आदमी पार्टी के नेता मनोज सोरठिया ने घोषणा की है कि जेल में बंद विधायक चैतर वसावा के समर्थन में राज्यभर में हस्ताक्षर...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल है.. आम आदमी पार्टी के नेता मनोज सोरठिया ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि.. जेल में बंद पार्टी के पूर्व विधायक चैतर वसावा के समर्थन में राज्यभर में घर-घर जाकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा.. इस अभियान का उद्देश्य लोगों का समर्थन जुटाकर राष्ट्रपति के समक्ष चैतर वसावा की सजा माफ करने की मांग रखना है.. पार्टी का कहना है कि वह राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तैयार करेगी.. जिस पर आम नागरिकों के हस्ताक्षर करवाए जाएंगे.. इसके बाद प्रत्येक जिले में बैठकें आयोजित की जाएंगी.. और जिला कलेक्टर के माध्यम से यह ज्ञापन राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाएगा..

वहीं यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब नर्मदा जिले की अदालत ने चैतर वसावा.. और उनके आठ अन्य साथियों को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है.. आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश और बदले की कार्रवाई बता रही है.. जबकि दूसरी ओर कुछ विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि.. अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए.. ऐसे में यह मामला केवल एक कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है.. बल्कि गुजरात की राजनीति.. और आदिवासी क्षेत्रों की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है..

चैतर वसावा गुजरात के आदिवासी इलाकों से आने वाले एक लोकप्रिय नेता रहे हैं.. वे नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा विधानसभा सीट से वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे.. उस चुनाव में उन्होंने उल्लेखनीय जीत दर्ज की थी.. और आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत आधार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.. विधानसभा पहुंचने के बाद पार्टी ने उन्हें गुजरात विधानसभा में अपना नेता भी बनाया था..

चैतर वसावा की पहचान केवल एक विधायक के रूप में नहीं रही.. बल्कि वे लंबे समय से आदिवासी समाज के जल, जंगल.. और जमीन के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं.. उन्होंने वन अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया.. यही वजह है कि नर्मदा, डेडियापाड़ा, भरूच और आसपास के आदिवासी इलाकों में उनका एक मजबूत जनाधार तैयार हुआ.. उनके समर्थकों का मानना है कि वे आदिवासी समाज की समस्याओं को विधानसभा से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं..

चैतर वसावा की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी आदिवासी आंदोलनों से जुड़ी रही है.. वे भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान आदिवासी नायकों से प्रेरणा लेने की बात कई बार सार्वजनिक मंचों पर कह चुके हैं.. उनका कहना रहा है कि आदिवासी समाज को उसके संवैधानिक.. और कानूनी अधिकार मिलने चाहिए तथा विकास योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए..

वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने राज्य में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया था.. हालांकि पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुंची.. लेकिन उसने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वोट हासिल किए.. विशेष रूप से आदिवासी इलाकों में चैतर वसावा जैसे नेताओं ने पार्टी के लिए समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आदिवासी मतदाताओं के बीच AAP की बढ़ती स्वीकार्यता में चैतर वसावा का बड़ा योगदान रहा..

आपको बता दें कि यह मामला नवंबर 2023 का बताया जाता है.. आरोप है कि चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा.. और उनके अन्य साथियों ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट की.. उन्हें धमकाया और कथित रूप से वसूली का प्रयास किया.. इस मामले में पुलिस ने कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था..

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद नर्मदा सेशंस कोर्ट ने जून 2026 में फैसला सुनाया.. अदालत ने चैतर वसावा सहित नौ लोगों को दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला, जबरन वसूली, धमकी.. और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दोषी माना और सभी को सात-सात वर्ष के कारावास तथा जुर्माने की सजा सुनाई.. इस सजा के बाद उनकी विधायकी भी समाप्त हो गई..

हालांकि आम आदमी पार्टी इस फैसले से पूरी तरह असहमत है.. पार्टी का आरोप है कि यह मुकदमा राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है.. AAP का कहना है कि चैतर वसावा लगातार भाजपा सरकार की आदिवासी नीतियों का विरोध कर रहे थे.. और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे.. इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया..

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई प्रक्रियात्मक अनियमितताएं हुईं.. AAP के नेताओं का कहना है कि कुछ गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए गए.. और बचाव पक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं मिला.. पार्टी इस पूरे मामले को झूठा केस करार दे रही है.. और दावा कर रही है कि.. न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपियों के अधिकारों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया..

इसी संदर्भ में AAP के राज्य संगठन महासचिव मनोज सोरठिया ने डेडियापाड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं.. और मीडिया को संबोधित करते हुए बड़े अभियान का ऐलान किया.. उन्होंने कहा कि पार्टी राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तैयार करेगी.. और घर-घर जाकर लोगों से उस पर हस्ताक्षर करवाएगी.. इसके बाद गुजरात के प्रत्येक जिले में बैठकें आयोजित की जाएंगी.. और जिला कलेक्टर के माध्यम से वह ज्ञापन राष्ट्रपति को भेजा जाएगा..

 

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