विधानसभा में लोकतंत्र कराहता रहा, सत्ता आंकड़ों में छिपती रही

हंगामे के बीच पास हुआ अनुपूरक बजट, बहस से भागी सरकार
सिर्फ कोडीन सिरप नहीं, बल्कि बिजली, यूरिया, डीएपी, और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी चर्चा के लिए विपक्ष की मांग
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र एक बार फिर इस सच्चाई की तस्दीक करता दिखा कि सत्ता अगर बहुमत के नशे में डूबी हो तो लोकतंत्र केवल शोर बनकर रह जाता है। आज सदन में न नीति पर गंभीर चर्चा हुई न जनता के जख्मों पर मरहम रखा गया। बस हंगामा हुआ आरोप लगे और उसी कोलाहल के बीच अनुपूरक बजट पास कर दिया गया। यह वही सदन है जहां जनता ने सवाल भेजे थे लेकिन सरकार जवाबों से बचती नजऱ आई। आज नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि कोडीन सिरप का मामला महज एक उदाहरण है असल तस्वीर कहीं ज्यादा भयावह है। बिजली की बेहाल व्यवस्था किसानों को न मिल रहा यूरिया और डीएपी चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं और महंगी होती जिंदगी इन सब पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार ने बहस के बजाय हंगामे को ढाल बना लिया।
हंगामे का कारण
सत्र में हंगामा इसलिए हुआ क्योंकि विपक्ष तत्काल और विस्तृत चर्चा चाहता था जबकि सरकार कार्यवाही को आगे बढ़ाने के मूड में थी। मुद्दे टकराए, आवाजें ऊंची हुईं और सदन शोरगुल में डूब गया। आज सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद पूरी तरह टूटा नजर आया गया।
सरकार ने खारिज किये आरोप
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। संसदीय कार्य मंत्री ने दावा किया कि कोडीन सिरप मामले में कार्रवाई की जा रही है और विपक्ष आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। बिजली को लेकर सरकार ने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन और आपूर्ति हो रही है और कुछ इलाकों की समस्याओं को पूरे प्रदेश की तस्वीर नहीं बताया जा सकता। यूरिया और डीएपी पर सरकार का तर्क था कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है लेकिन हालात नियंत्रण में हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार ने मेडिकल कॉलेजों, आयुष्मान भारत और नए अस्पतालों की लंबी सूची पढ़कर जवाब दिया। सरकार का कहना था कि विपक्ष विकास को देखना ही नहीं चाहता।
विपक्ष ने लगाये आरोप
विपक्ष ने सरकार पर बेहद गंभीर और बहुस्तरीय आरोप लगाए। सबसे पहले कोडीन युक्त कफ सिरप के दुरुपयोग और कथित मौतों का मामला उठाया गया। विपक्ष ने कहा कि सरकार इस पूरे प्रकरण को हल्के में ले रही है और सच्चाई को दबाने की कोशिश कर रही है। सवाल पूछा गया कि जब अन्य राज्यों में इस सिरप पर सख्ती है तो उत्तर प्रदेश में इतनी ढील क्यों? इसके बाद विपक्ष ने बिजली संकट का मुद्दा उठाया। ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली गायब शहरों में महंगे बिल विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए जनता की जेब काट रही है। किसानों की बात आई तो सदन और गरमा गया। यूरिया और डीएपी की किल्लत को विपक्ष ने सरकारी नाकामी का जीता जागता सबूत बताया। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी तीखा हमला हुआ। विपक्ष का कहना था कि मेडिकल कालेजों की इमारतें खड़ी हैं लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। दवाइयां कागजों में हैं अस्पतालों में नहीं। गरीब मरीज इलाज के लिए भटक रहा है और सरकार विज्ञापनों में डूबी हुई है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इन मुद्दों पर चर्चा नहीं चाहती क्योंकि सच्चाई सामने आ गई तो सत्ता की चमक फीकी पड़ जाएगी।
अनुपूरक बजट पास
हंगामे के बीच सरकार ने अनुपूरक बजट पास करवा लिया। इस बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान बताया गया। सरकार ने इसे जनकल्याणकारी बताया। हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह बजट जमीनी जरूरतों से ज्यादा राजनीतिक प्राथमिकताओं से भरा है। सवाल यह भी उठा कि जब इतनी बड़ी राशि खर्च हो रही है तो जनता को उसका लाभ क्यों नहीं दिख रहा? बिना विस्तृत बहस के बजट का पास होना विपक्ष की नजर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की हत्या है।
विपक्ष वेल में, सरकार बोलती रही ऑल इल वेल
सदन में दृश्य कुछ ऐसा था मानो लोकतंत्र की रीढ़ टूट चुकी हो। विपक्ष वेल में था सत्ता पक्ष आंकड़ों की फाइलों में। सवाल जमीन के थे जवाब सत्ता के अहंकार में दबे हुए। सरकार कहती रही सब ठीक है जबकि विपक्ष बार-बार याद दिलाता रहा कि जमीनी सच्चाई फाइलों से बाहर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अनुपूरक बजट जैसे अहम वित्तीय दस्तावेज को बिना व्यापक चर्चा के पास करना लोकतंत्र का अपमान नहीं है? विपक्ष का कहना है कि सरकार बहस से इसलिए डर रही है क्योंकि जवाब देने की स्थिति में नहीं है। सदन में कोडीन सिरप पर उठे सवालों ने सत्ता की नींद उड़ा दी, और सरकार ने वही किया जो अक्सर किया जाता है — मुद्दा भटकाओ शोर बढ़ाओ और काम निपटा दो। यह सत्र एक बार फिर साबित कर गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज लड़ाई विचारों की नहीं बल्कि नियंत्रण की है। सत्ता चाहती है कि सवाल न उठें और विपक्ष चाहता है कि सवालों को दबाया न जाए। इसी टकराव में आज विधानसभा का पूरा दिन खप गया।




