सर्दियों में करें ये योगासन, स्वस्थ्य रहेगा शरीर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
सर्दियों की ठिठुरन भरी सुबह में अक्सर लोगों को उठने में आलस आता है। इस आलस के चलते दिनभर शरीर और मन थका-थका महसूस करता है। सर्द हवा बदन में घुसते ही सुस्ती, जकडऩ और खांसी-जुकाम दस्तक देने लगते हैं। इस मौसम में शरीर को ऊर्जावान रखना चुनौती होता है लेकिन योग इसका सबसे सटीक समाधान है। सर्दियों में योगासनों के अभ्यास की आदत बना लें। सर्दियों में शरीर को तैयार करना समय पर ढाल बनाना है। जो लोग योग को रूटीन में शामिल करते हैं, उनकी इम्युनिटी मजबूत, मन शांत और शरीर एक्टिव रहता है। शरीर को एक्टिव और मन को शांत करने में मदद मिलेगी। सुबह की ठंडी हवा में 10-15 मिनट का योगाभ्यास पूरे मौसम में आपको रोगमुक्त रख सकता है। अपने दिनचर्या में योगासनों को शामिल करके शरीर के लिए कवच तैयार करें। ये योगासन आंतरिक गर्मी उत्पन्न करने और रक्त संचार में सुधार करने में मदद करते हैं। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। मांसपेशियों को पूरी तरह से सक्रिय करने और ध्यान केंद्रित करने में भी सहायक होते हैं।
नौकासन
सर्दियों में यह आसन करने से शरीर और दिमाग के बीच में बैलेंस बनता है। इतना ही नहीं ठंड के दिनों में यह आपको वॉर्म रखता है। साथ ही शरीर के एलाइनमेंट में सुधार करता है। नौकासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को सीधा फैलाएं और साथ रखें। दोनों हाथों को शरीर के बगल में सीधा रखते हुए गहरी सांस लें। अब सांस छोड़ते हुए छाती और पैरों को जमीन से ऊपर हवा में उठाएं। अपनी बाहों को पैरों की ओर जितना संभव हो खींचे। ध्यान रहें कि इस दौरान आंखें, उंगलियों और पैर की उंगलियां एक सीध में ही होनी चाहिए। इस अवस्था के दौरान पेट की मांसपेशियों के सिकुडऩ पर नाभि क्षेत्र में तनाव महसूस होगा। अब इसी मुद्रा में रहते हुए आराम से गहरी सांस लेते रहें। कुछ देर नौकासन की स्थिति में रहें, फिर पहली वाली सामान्य अवस्था में आ जाएं।
सूर्य नमस्कार
इस मौसम में रक्त संचार धीमा पड़ जाता है, सूर्य नमस्कार उसे तेज करता है और शरीर को भीतर से गर्म करता है। यह थायरॉइड और इम्युनिटी को मजबूत बनाता है जिससे सर्दियों वाली थकान, सुस्ती और बीमारियाँ दूर रहती हैं। 12 चरणों वाला यह आसन कैलोरी बर्न और हार्मोन बैलेंस में भी प्रभावी है। सुबह की हल्की धूप में इसका अभ्यास विटामिन डी के साथ बेहद लाभकारी होता है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास खुले स्थान पर 5 चक्र से शुरू कर करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। 15 चक्र तक नियमित रूप से करें।
भुजंगासन
ठंड में मांसपेशियांसख्त हो जाती हैं। भुजंगासन रीढ़ और पीठ को सक्रिय रखता है। यह श्वसन तंत्र को खोलता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। ठंड में सांस से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। लगातार बैठकर काम करने वालों में जमने वाला दर्द और स्टिफनेस इससे कम होती है। इसके अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर, हथेलियों को कंधों के पास टिकाएं और धीरे-धीरे ऊपर उठें। 30 सेकंड रुककर तीन से पांच बार इसे दोहराएं। किडनी की कार्यक्षमता सुधारने के लिए भी भुजंगासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है।
वृक्षासन
ठंड में यह आसन आप सुबह कर सकते हैं। इसमें एक पैर पर खड़े होकर संतुलन बनाना होता है। इससे शरीर और मन दोनों को स्थिरता आती है। फोकस बढ़ाता है। तनाव कम होता है। दिनभर एनर्जी बनाए रखने में मदद करता है। पैर, टखनों, जांघों, पिंडलियों और घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती है। रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। वृक्षासन के नियमित अभ्यास से दिमाग को स्वस्थ और संतुलित रखने में मदद मिलती है।
त्रिकोणासन
सुबह के समय यह आसन करने से कोर मसल्स एक्टिवेट होते हैं। इसके साथ ही तन-मन में संतुलन और स्थिरता लाने में मदद करता है। रीढ़ को लचीला बनाने में सहायक है। आप स्ट्रेस और चिंता विकृति को कम कर सकते हैं। यह योग आपकी नींद में सुधार करके आपके मूड को बेहतर कर सकता है।
शीर्षासन
इस आसान को सर्दी के मौसम में करने से आपको गर्माहट के साथ मजबूती मिलेगी है। इसे करने से दिनभर एक्टिव महसूस करेंगे। खास बात ये है कि यह दिमाग को शांत कर पूरे शरीर को मजबूत बनाता है। शीर्षासन में शरीर को सिर के बल संतुलित किया जाता है और पैरों को ऊपर की ओर सीधा रखा जाता है। यह एक उन्नत योगासन है, जिसे करने के लिए संतुलन, ताकत और ध्यान की आवश्यकता होती है। इसे करने से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बढ़ता है जिससे एनर्जी और अलर्टनेस में सुधार होता है। लेकिन सभी योगासन हर व्यक्ति के लिए नहीं होते और शीर्षासन भी उन्हीं में से एक है।



