भरत तिवारी एनकाउंटर पर बिहार में भूचाल
सीएम सम्राट पर विपक्ष के साथ सहयोगी भी उठा रहे सवाल

जेडीयू बोली- तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष सामने आएगा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार के भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर पूरे राज्य में घमासान मच गया। भाजपा सरकार के सीएम सम्राट चौैधरी पर जहां विपक्ष का प्रहार जारी है वहीं उनकी सहयोगी पार्टी जदयू के साथ उनकी ही पार्टी के कई नेताओं ने उनकी कार्यशैली पर निशाना साधा है। आपको बता दें केस की जांच जारी है। एनकाउंटर करने वाले पुलिस पदाधिकारी सवालों के घेरे में हैं। बीजेपी के नेता तक इस मामले पर फायर हैं। इन सबके बीच मंगलवार (23 जून, 026) को बिहार के सीएम सम्राट चौधरी से पत्रकारों ने इस मामले को लेकर सवाल किया। सवाल पूछा गया तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चुप्पी साध ली। उन्होंने एक शब्द तक नहीं कहा। सम्राट चौधरी श्याम प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पटना स्थित पार्टी कार्यालय पहुंच थे।
मीडिया ने सवाल किया कि सर एनकाउंटर मामले पर बोल दीजिए, भरत तिवारी पर बोल दीजिए, इस मामले में जातिवाद का आरोप लग रहा है, बीजेपी के नेताओं ने ही सवाल उठाया है. इतने सवाल के बाद भी सीएम सम्राट चौधरी ने एक लाइन जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
एडीजी के अनुसार, मुठभेड़ से संबंधित परिस्थितियों की जांच के लिए आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जा रहा है. जांच में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) विश्लेषण, तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच, भौतिक साक्ष्यों का संग्रह और सत्यापन, और उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य सामग्रियों की जांच शामिल है. पुलिस मुख्यालय जांच की प्रगति पर लगातार नजर रख रहा है। इससे पहले जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी भरत तिवारी एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जो वीडियो सामने आया है, वह निश्चित रूप से संदेह पैदा करता है। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, लेकिन वह काफी नहीं है। सीनियर पदाधिकारी द्वारा इस मामले की समयबद्ध जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार जब यह कहती है कोई भी अपराधी बचेगा नहीं, तो यह सिर्फ अपराधियों के लिए नहीं होता है। अगर पुलिसकर्मी भी कोई अपराध करता है, तो वह भी बचना नहीं चाहिए, उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
कमजोरों की आवाज बने तो जान गंवानी पड़ी :अश्विनी
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौबे ने कहा कि भरत भूषण तिवारी पर कभी कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था। उन्होंने दावा किया कि तिवारी समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाते थे और इसी संघर्ष के दौरान उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। चौबे ने कहा कि भरत तिवारी गरीबों के हक की लड़ाई लड़ रहे थे। बाढ़ पीडि़तों, भूमिहीनों और वंचित वर्गों के लिए संघर्ष करते-करते उन्होंने अपनी जान दे दी। अश्विनी कुमार चौबे ने आरोप लगाया कि पुलिस का व्यवहार ऐसा था मानो तिवारी कोई बड़ा अपराधी, नक्सली, उग्रवादी या डकैत हों। उन्होंने कहा कि तिवारी के घर बार-बार पुलिस बल भेजा जाता था, जिससे उन पर और उनके परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ रहा था। उनके पिता पुलिस विभाग में हवलदार रहे थे और सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बावजूद जिस तरह पुलिस का काफिला उनके घर पहुंचता था, उससे परिवार परेशान और विचलित हो जाता था। घटना वाले दिन भरत तिवारी घर से निकलकर एक गरीब बस्ती में चापाकल लगवाने के काम से गए थे। भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उनकी नृशंस हत्या कर दी गई।
मंत्री अशोक चौधरी ने सीधे हत्या बताया
वहीं बिहार सरकार में छ्वष्ठ कोटे से मंत्री अशोक चौधरी ने इसे सीधे हत्या बताया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस ने इस मामले में गलत किया। पुलिस को विपरीत हालात को कंट्रोल करने की ट्रेनिंग दी जाती है। रंगदार और अपराधियों से पुलिस एनकाउंटर कर सकती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि जिसे दिल करे उसे ही गोली मार दी। ऐसे पुलिसवालों के खिलाफ तो हत्या का केस चलना चाहिए। इसके अलावा मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी भरत तिवारी के एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे।
इस मामले में कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी सरकार : राजीव
भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले पर नीतीश कुमार की पार्टी का बड़ा बयान आया है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भरत तिवारी के एनकाउंटर के मुद्दे पर कहा कि बिहार सरकार न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगी।राजीव रंजन ने कहा, भरत तिवारी एनकाउंटर मामला फिलहाल अदालत में लंबित है… मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, इसलिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, ताकि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष सामने आ सके।

यूपी-दिल्ली में भी जल्द दस्तक देगी बारिश
मॉनसून की मुंबई में धमाकेदार एंट्री
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। मॉनसून करीब एक हफ्ते की देरी के बाद महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई पहुंच गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, 23 जून को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मुंबई सहित महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा के बाकी हिस्सों, और छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है. अगले 2-3 दिनों में मॉनसून के उत्तर अरब सागर और गुजरात के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढऩे के लिए हालात अनुकूल हैं।
इसके बाद के 3-4 दिनों में यह झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी आगे बढ़ सकता है। अलनीनो के प्रभाव में कमजोर मॉनसून का असर दिखाई दे रहा है। मॉनसून में 1 से 22 जून के बीच देश में बारिश की कमी बढक़र 43 फीसदी हो गई है। इस साल कमजोर मॉनसून का प्रभाव पर दिखने लगा है। भारत मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जून के पहले तीन हफ्तों में अब तक देश में औसत से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम के पूर्वानुमान में भारत मौसम विभाग ने कहा है कि आमतौर जून के 22 दिनों के बीच देश में औसतन 1०6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड होती है, लेकिन इस साल इस अवधि में सिर्फ 6०.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
अमोनिया रिसाव से 9 महिला मजदूरों की मौत
- फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में एक प्राइवेट सीफ़ूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट फ़ैसिलिटी में अमोनिया गैस लीक होने से मरने वालों की संख्या मंगलवार को बढक़र नौ हो गई। ज़हरीली गैस का यह रिसाव 21 जून को रूटीन इंडस्ट्रियल कामकाज के दौरान हुआ था और मरने वाले सभी लोग महिलाएं थीं। हेल्थ डिपार्टमेंट ने बताया कि 69 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था और उनकी हालत पर बारीकी से नजऱ रखी जा रही है।
डिपार्टमेंट ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावित इलाके की निगरानी और जांच भी की जा रही है, जबकि ज़िला प्रशासन और हेल्थकेयर संस्थान इलाज, निगरानी और रिस्पॉन्स से जुड़े कामों में तालमेल बिठा रहे हैं। विभाग के अनुसार, मरने वाली महिलाओं में से सात ओडिशा की और दो असम की थीं। मरने वालों में से आठ की पहचान शिबानी, जुमानी जुआंग, गीता जुआंगा, पूर्णिमा जुआंगा, चंपावती जुआंगा, पार्वती जुआंगा, सीता हांसदा और अंजीता सोरेन के तौर पर हुई, जबकि एक व्यक्ति की पहचान अभी नहीं हो पाई थी। यह रिसाव पेरियापालयम के पास कनिगईपायर/मंजुंगारनाई इलाके में मौजूद एक फ़ैसिलिटी में हुआ। प्रभावित लोगों को अमोनिया गैस अंदर जाने के गंभीर लक्षणों के साथ अस्पतालों में भर्ती कराया गया; इन लक्षणों में बहुत ज़्यादा सांस लेने में तकलीफ़, खांसी, सीने में बेचैनी और आंखों व सांस की नली में जलन शामिल थी। भर्ती किए गए लोगों में से 27 का इलाज वेल्स हॉस्पिटल में, 18 का वेंकटेश्वर हॉस्पिटल में, 11 का राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में और 13 का स्टेनली मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में चल रहा था। दो अन्य लोगों को पहले ही छुट्टी दी जा चुकी थी। हादसे की असल वजह की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि वह स्थिति पर बारीकी से नजऱ रखना जारी रखेगा और सभी प्रभावित लोगों के लिए सही मेडिकल देखभाल सुनिश्चित करेगा।
कांग्रेस संगठन में होंगे बड़े फेरबदल, चार महासचिवों की होगी छुट्टी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल की खबर है। कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और एआईसीसी में बदलाव की आहट तेज हो गई है। यह बदलाव आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, चार महासचिवों की छुट्टी हो सकती है।
इसके अलावा तीन से 4 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। 6 से 7 राज्यों के प्रदेश प्रभारी हटाए जाएंगे। करीब 26 राष्ट्रीय सचिवों की छुट्टी होगी, अभी 62 राष्ट्रीय सचिव हैं। सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद, महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला, छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडंकर, राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा हटाए जाएंगे।
तमिलनाडु अपनी नीति पर अटल: विजय
- नीट और हिंदी थोपने पर सीएम की दो टूक
- विधानसभा में विपक्ष पर बरसे
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने उन आलोचकों को करारा जवाब दिया है जिन्होंने उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) को एक्टर की पार्टी कहा है। मंगलवार सुबह विधानसभा में दिए भाषण में उन्होंने अप्रैल-मई के चुनावों में टीवीके की सफलता की ओर इशारा करते हुए आलोचकों को याद दिलाया कि उनकी पार्टी कितनी सफल रही है। अपने दमदार भाषण में उन्होंने कई मुद्दों पर बात की – जैसे केंद्र सरकार का गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपना और नीट को खत्म करने की मांग।
उन्होंने टीवीके की राजनीतिक ताकत और अपनी प्रशासनिक समझ पर शक करने वालों और आलोचना करने वालों को आड़े हाथों लिया। विजय ने विधानसभा को याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने साजिशों और पाबंदियों का सामना किया है और न तो पार्टी और न ही उनका खुद का इरादा कभी खत्म होने का है। उन्होंने कहा कि हमें आसानी से सत्ता नहीं मिली। सिर्फ़ हम ही जानते हैं कि तमिल लोगों के दिलों में जगह बनाने के लिए हमने कितना संघर्ष किया है… कुछ लोग ऐसा दिखावा करते हैं जैसे वे समझते नहीं हैं और हमारी आलोचना करते हुए कहते हैं, वह तो बस एक एक्टर है और पार्टी भी बस एक एक्टर की पार्टी है।
आलोचनाओं की परवाह नहीं करते
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हम ऐसी आलोचनाओं की परवाह नहीं करते। हमारी राजनीति साफ़-सुथरी है। हमें 35 प्रतिशत वोट मिले। कुछ लोग कहते हैं कि हम बहुत आसानी से सत्ता में आ गए… लेकिन हमने साजिशों और पाबंदियों का सामना किया। हमने हर चीज़ का सामना किया… और आज हम यहाँ हैं। अभी लंबा सफऱ तय करना बाकी है। (नेशनल एंट्रेंस-एलिजिबिलिटी टेस्ट) – जो देश में मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए एक ही क्वालिफाइंग एग्ज़ाम है – पर चल रहे विवाद पर विजय ने कहा कि यह सिस्टम असमानता पैदा करता है और उन्होंने इसे खत्म करने की मांग की। विधानसभा में कहा कि हालांकि उनकी पार्टी ने द्रविड़ राजनीति के जनक माने जाने वाले पेरियार ई.वी. रामासामी के व्यापक सामाजिक सिद्धांतों को अपनाया है, लेकिन वे नास्तिकता और धार्मिक मान्यताओं को नकारे जाने के उनके विचारों से सहमत नहीं हैं। पेरियार की तर्कवादी सोच और अपनी पार्टी के रुख के बीच अंतर बताते हुए विजय ने कहा कि हमने धार्मिक मान्यताओं को नकारे जाने के पेरियार के विचार को स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनके व्यापक सिद्धांतों को पूरी तरह अपनाया। हमने पेरियार की शिक्षाओं को तो अपनाया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि हम ईश्वर में विश्वास रखते हैं। हमने हमेशा यह साफ किया है कि हम किसी की विचारधारा के विरोधी नहीं हैं।



