आतंकी धमकी के बाद कश्मीरी पंडितों में खौफ, 6 हजार कर्मचारी सुरक्षा को लेकर चिंतित

कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे लगभग 6 हजार कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आतंकवादी संगठनों की ओर से फिर से जान से मारने की धमकियां मिली हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे लगभग 6 हजार कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आतंकवादी संगठनों की ओर से फिर से जान से मारने की धमकियां मिली हैं.

जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक बार फिर आतंकी धमकी मिली है. लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा वाले आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल की तरफ से धमकी भरी चिट्ठी सामने आने के बाद घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे करीब 6 हजार कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक महीने में इस तरह की यह छठी धमकी भरी चिट्ठी है. इस बार प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक बार फिर निशाना बनाया गया है.

धमकी भरी चिट्ठी सामने आने के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनके परिवारों में डर का माहौल है. कर्मचारियों के संगठन ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से पूरे मामले की जांच कराने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.

शेखूपुरा में कश्मीरी पंडित परिवारों की बड़ी कॉलोनी

बडगाम जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर शेखूपुरा में कश्मीरी पंडित परिवारों की बड़ी कॉलोनी है. इस कॉलोनी में करीब 330 परिवार रहते हैं. करीब 12 फीट ऊंची दीवारों से घिरी इस कॉलोनी में पहले भी सुरक्षा व्यवस्था रहती थी, लेकिन अब धमकी के बाद सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है.

कॉलोनी के गेट पर जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के जवान तैनात हैं. कॉलोनी से बाहर जाने वाले लोगों की जानकारी दर्ज की जा रही है. लोगों को पहचान पत्र साथ रखने की हिदायत दी गई है. कर्मचारियों और उनके परिवारों को शाम होने से पहले कॉलोनी वापस लौटने के लिए कहा जा रहा है.

सामान्य जिंदगी शुरू करने की कोशिश

यानी जिन परिवारों ने लंबे समय बाद घाटी में वापस आकर सामान्य जिंदगी शुरू करने की कोशिश की थी, उनके सामने एक बार फिर सुरक्षा का डर खड़ा हो गया है. नौकरी के लिए घर से निकलना और शाम को वापस लौटना भी अब इन परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गया है.

दरअसल, वर्ष 2008 में केंद्र सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री पैकेज शुरू किया गया था. इसके तहत करीब 6 हजार कश्मीरी पंडितों को जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियां और आवास उपलब्ध कराए गए. इन कर्मचारियों में से बड़ी संख्या में कर्मचारी घाटी के अलग-अलग इलाकों में बनाए गए ट्रांजिट कैंपों में अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं.

सामान्य जिंदगी की उम्मीद के साथ की थी वापसी

शेखूपुरा के अलावा कुलगाम का वुस्सू कैंप, बारामुला और कुपवाड़ा भी ऐसे प्रमुख इलाके हैं, जहां प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारी और उनके परिवार रह रहे हैं. अकेले वुस्सू कैंप में करीब 426 परिवार बताए जाते हैं. इन कर्मचारियों और उनके परिवारों ने घाटी में सामान्य जिंदगी की उम्मीद के साथ वापसी की थी. लेकिन लगातार सामने आ रही धमकी भरी चिट्ठियों ने एक बार फिर उनकी चिंता बढ़ा दी है.

सबसे बड़ी चिंता यह है कि धमकी देने वालों के पास कर्मचारियों के फोन नंबर, पते और वाहनों जैसी निजी जानकारी होने का दावा किया गया है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि यह जानकारी आतंकी संगठनों तक कैसे पहुंच रही है और धमकी के पीछे कौन लोग हैं.

कर्मचारियों की सुरक्षा एक बार फिर बनी बड़ा मुद्दा

फिलहाल करीब 6 हजार प्रधानमंत्री पैकेज कर्मचारियों की सुरक्षा एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गई है. कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें सिर्फ सुरक्षा घेरे में नहीं, बल्कि ऐसा भरोसेमंद माहौल मिले जिसमें वे बिना डर के अपनी नौकरी कर सकें और उनके परिवार सामान्य जिंदगी जी सकें.

लगातार सामने आ रही इन धमकियों के बीच अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ धमकी देने वालों तक पहुंचने की नहीं है, बल्कि उन लोगों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है, जिन्हें इन धमकियों में निशाना बनाया जा रहा है.

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