दिल्ली के रिहायशी इलाकों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, कहा- बच्चे खेल नहीं सकते, बुजुर्ग टहल नहीं सकते

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि HC की कार्यवाही केवल पीजी हॉस्टल गिरने तक ही सीमित नहीं होगी,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि HC की कार्यवाही केवल पीजी हॉस्टल गिरने तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें दिल्ली में अवैध निर्माण से जुड़े वे मामले भी शामिल होंगे जो वर्तमान में एसी में लंबित हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हाल ही में गिरी पांच मंजिला इमारत से जुड़ी याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की, इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली वाले मामले पर फैसला करेंगे और जहां तक दूसरे मामलों की बात है, हम एक स्पष्टीकरण जारी करेंगे, जिससे अधिकारियों को कुछ राहत मिल सकती है. सबसे पहले हम जमीन के इस्तेमाल पर ध्यान देंगे.

बेंच ने कहा कि रिहायशी इलाकों में बच्चे खेल नहीं सकते, माता-पिता टहल नहीं सकते, कई तरह की दिक्कतें हैं. उन्हें बदलाव महसूस होना चाहिए. हमारा प्रस्ताव है कि हम उस मामले को सुनवाई के लिए लेंगे. हम इस पर स्पष्टीकरण देंगे. हमारा मुख्य ध्यान ज़मीन के इस्तेमाल की पुष्टि करने पर होगा. जिन इलाकों को पूरी तरह से रिहायशी घोषित किया गया है, क्या वहां नियमों का उल्लंघन हुआ है? हमारा पहला ध्यान इसी बात पर होगा.

हम पर भरोसा रखें: सुप्रीम कोर्ट

एसजी तुषार मेहता ने कहा, चूंकि यह एक स्थानीय मामला है, इसलिए क्या इसे दिल्ली हाई कोर्ट पर छोड़ा जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मिस्टर मेहता, दो महीने बाद आप समझ जाएंगे कि हम क्या कह रहे हैं. हम पर भरोसा रखें. हमें अपना मकसद पता है और मुझे लगता है कि हम सही रास्ते पर हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले को दिल्ली हाई कोर्ट से अपने पास ट्रांसफर करेगा. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह भी साफ किया कि कोर्ट का मुख्य ध्यान उन इलाकों के कमर्शियल इस्तेमाल पर होगा. जिन्हें दिल्ली NCR में रिहायशी इलाका माना गया है.

दिल्ली हाई कोर्ट में ही होगी सुनवाई

दिल्ली सरकार की ओर से पेश SG तुषार मेहता से जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट को आदेश न देने दें. अगर हमें आपकी मदद नहीं मिली, तो हम नाकाम हो जाएंगे.

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दिल्ली हाई कोर्ट सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले की सुनवाई जारी रखेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि हाई कोर्ट पहले से ही पीजी त्रासदी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है, इसलिए उसके लिए इस मामले की निगरानी जारी रखना उचित होगा.

पीजी हॉस्टल गिरने तक ही सीमित नहीं होगी कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि संबंधित प्राधिकरण द्वारा हाई कोर्ट में कोई रिपोर्ट दाखिल की जाती है, तो उसकी एक प्रति सुप्रीम कोर्ट को भी सौंपी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे साफ किया कि हाई कोर्ट की कार्यवाही केवल पीजी हॉस्टल गिरने तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें दिल्ली में अवैध निर्माण से जुड़े वे मामले भी शामिल होंगे जो वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं.

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