अमरावती से उठी सियासी परछाईं की जद में नया आकार

यूपी, बिहार के बाद पश्चिम बंगाल पर असर, एआईएमआईएम के एक वोट से बीजेपी का मेयर

जीत का अंतर इतना मामूली था कि उस एक वोट ने इतिहास लिख दिया
परिणाम के बाद स्थानीय राजनीति में उबाल
बीजेपी/एआईएमआईएम दोनों ने अलग-अलग तरीके से व्याख्याएं पेश कीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अमरावती में मेयर पद के लिए हुए चुनाव में आखिरी क्षण पर पड़ा एक वोट ने पूरे देश की सियासी तस्वीर के साथ औवसी की सियासी तकदीर को पलट कर रख दिया है। दरअसल जिसे स्वाभाविक विरोधी माना जाता रहा है उसी एआईएमआईएम के पार्षद मीरा कांबले के एक वोट ने ऐसा सियसी रायता फैला दिया है जिसे समेटने के लिए असदुदीन औवेसी को बहुत मेहनत करनी होगी। मीरा कांबले के वोट ने विपक्ष के उस नैरेटिव को प्रूफ के तौर पर साबित करने का काम कर दिया है।
कांग्रेस समेत सपा, राजद जैसी पार्टियां लबे समय से एआईएमआईएम को बीजेपी की बी टीम कहती चली आ रही है। ?अखिलेश यादव और तेजस्वी जैसे नेता तो खुले मंच से इस बात को कई बार कह चुके हैं। अब मीरा कांबले के इस क्रोस वोट के चलते अमरावती का मेयर पद सीधे बीजेपी के खाते में चला गया। अब बड़ा और अहम सवाल यही है कि यह सिर्फ़ एक स्थानीय गणित था या किसी बड़े पैटर्न की एक और कड़ी?

 

जश्न और सन्नाटा साथ—साथ

राजनीति में संयोग होते हैं पर संयोगों का सिलसिला जब बार-बार एक ही दिशा में मोड़ ले तो संदेह पैदा होता है। अमरावती में हुआ फैसला इसलिए असहज करता है क्योंकि यह उस धारणा से टकराता है जिसमें एआईएमआईएम को बीजेपी विरोधी मंच पर देखा जाता रहा। यही वजह है कि इस एक वोट ने जीत-हार से ज़्यादा विश्वास को चोट पहुंचाई है। और इस चोट का नतीजा अमरावती नगर निगम की सीढय़िों पर जश्न और सन्नाटे के तौर पर सामने आया। अमरावती में जश्न और सन्नाटा एक साथ दोनों देखने को मिले।

सबूत के साथ परिणाम

आरोपों की फाइल नई नहीं है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेताओं से लेकर बिहार में राजद खेमे तक लंबे समय से आरोप लगा रहे हैं कि एआईएमआईएम की एंट्री जहां भी होती है वहां मुस्लिम वोटों का विभाजन होता है और उसका अप्रत्यक्ष लाभ बीजेपी को मिलता है। एआईएमआईएम इन आरोपों को खारिज करती है खुद को हाशिये की आवाज़ बताती है। लेकिन अमरावती ने बहस को फिर जगा दिया है कि इस बार सबूत के साथ परिणाम बोल रहा हैं। यह कहानी इसलिए भी डराती है क्योंकि यह खुली साजिश की नहीं सूक्ष्म राजनीति की कहानी है। जहां कोई धुआं नहीं दिखता पर आग की गर्मी हर चुनाव में महसूस होती है। एक वोट एक नगर और फिर वही बहस क्या यह स्थानीय विवेक था या किसी बड़े रणनीतिक नक्शे का छोटा सा निशान? अमरावती ने देश को आईना दिखाया हैऔर आईने में कई अनउत्तारित सवाल खड़े हैं।

विभाजन की राजनीति बनाम गठबंधन की मजबूरी

यूपी में सपा लंबे समय से यह तर्क देती आयी है कि एआईएमआईएम की सीमित लेकिन रणनीतिक एंट्री मुस्लिम वोटों को काटती है। खासतौर पर शहरी/अर्धशहरी सीटों पर इस का असर ज्यादा देखने को मिलता है। सपा के मुस्लिम नेता लगातार इस बात को दोहरा रहे है कि जब मुकाबला सीधा बीजेपी बनाम विपक्ष होता है तब तीसरा ध्रुव यानि कि एआईएमआईएम मार्जिन को निर्णायक बना देता है। जबकि एआईएमआईएम का जवाब साफ़ रहा है कि हम प्रतिनिधित्व चाहते हैं किसी के वोट नहीं काटते। अमरावति के रिजल्ट के बाद सपा जैसे राजनीतिक दलों के आरोपों में दम आयेगा और अमरावित का चुनावी रिजल्ट उसे उसके अरोपों को सिद्ध करने में मदद करेगा।

बंगाल में बीजेपी के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार है टीएमसी

तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि वह ही बंगाल में बीजेपी के खिलाफ़ सबसे मज़बूत दीवार है और मुस्लिम वोटों का बिखराव उस दीवार में दरार डाल सकता है। कांग्रेस के लिए चिंता और गहरी है। क्योंकि पार्टी पहले ही सीमित राजनीतिक स्पेस में संघर्ष कर रही है। ऐसे में एआईएमआईएम की एंट्री कांग्रेस के बचे-खुचे जनाधार को और संकुचित कर सकती है। दूसरी ओर एआईएमआईएम का दावा है कि वह उन तबकों की आवाज़ बनना चाहती है जिन्हें बड़े दल सिर्फ़ चुनावी मौसम में याद करते हैं।

अमरावती की घटना ने बंगाल में बहस को और तीखा किया

अमरावती की घटना ने बंगाल में इस बहस को और तीखा कर दिया है कि क्या एआईएमआईएम की रणनीति अनजाने में बीजेपी को लाभ पहुंचा सकती है। यहां सवाल आरोप का नहीं परिणाम की आशंका का है। अगर कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना और मार्जिन छोटा रहा तो राजनीतिक फायदा किसे मिलेगा। यह सवाल अब केवल सियासी बहस नहीं बल्कि रणनीतिक गणना बन चुका है। बंगाल इसलिए भी खास है क्योंकि यहाँ चुनाव सिर्फ़ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने का संकेतक माना जाता है। ऐसे में एआईएमआईएम की हर चाल, हर उम्मीदवार और हर सीट पर उसकी मौजूदगी को बड़े दल माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देख रहे हैं। अमरावती के बाद बंगाल वह अगला मंच बनता दिख रहा है, जहाँ एक-एक वोट की कीमत सत्ता के पूरे समीकरण को बदल सकती है।

भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर फिर रार

कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा राजनाथ ने समझौते की अंतरिम रूपरेखा की सराहना की

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी कर दी गई है। दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तय किया है और इस पर संयुक्त बयान जारी किया है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा मिलने की संभावना के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में अब इस समझौते को लेकर जारी संयुक्त बयान पर सत्ता पक्ष, विपक्ष समेत कई एजेंसियों की प्रतिक्रिया सामने आई है। एक तरफ जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे निर्यात का बड़ा अवसर बताया है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की जीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ी हार बताया। आइए जानते हैं किसने क्या कहा? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के लिए कई बड़े फायदे लेकर आएगा। इससे निर्यात बढ़ेगा, मजदूर-आधारित उद्योग मजबूत होंगे और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि इस जयराम रमेश ने कहा कि पहली बात यह है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अगर खरीदा तो अमेरिका 25 फीसदी टैरिफ (जुर्माना) लगा सकता है। दूसरी बात, भारत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा या खत्म करेगा। तीसरी बात, भारत का अमेरिका से आयात हर साल तीन गुना तक बढ़ सकता है। इससे भारत-अमेरिका व्यापार, जो अभी भारत के पक्ष में है, घाटे में जा सकता है। चौथी बात, इस समझौते में आईटी और सेवा क्षेत्र का कोई जिक्र नहीं है। पांचवीं और आखिरी बात यह है कि भारतीय उत्पादों पर निर्यात शुल्क बढ़ रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि यह समझौता अमेरिका के हित में है और इसके असली असर तब साफ होंगे, जब इसके पूरे ब्योरे सामने आएंगे।

जीत गए नमस्ते ट्रंप : जयराम रमेश

भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि यह समझौता अमेरिका के फायदे में है और इससे भारत को नुकसान हो सकता है। जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि नमस्ते ट्रंप जीते, हाउडी मोदी हारे। उनका कहना है कि सरकार ने जो संयुक्त बयान जारी किया है, उसमें पूरी जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन जो बातें सामने आई हैं, उनसे पांच बातें साफ होती हैं।

पंजाब में आप नेता लक्की ओबेरॉय की हत्या मामले में मामला दर्ज

गैंगस्टर जोगा फोलरीवाल भी शामिल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
जालंधर। पंजाब के जालंधर जिले में आम आदमी पार्टी नेता की दिनदहाड़े हत्या के मामले में गैंगस्टर जोगा फोलरीवाल सहित 2 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को जालंधर मे आप नेता लकी ओबेरॉय की दिनदहाड़े हत्या के मामले में विदेश में रहने वाले एक गैंगस्टर समेत दो लोगों पर केस दर्ज किया गया है।
पुलिस को शक है कि हत्या के पीछे निजी दुश्मनी वजह हो सकती है। उन्होंने बताया कि पीडि़त परिवार की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने गैंगस्टर जोगराज सिंह उर्फ जोगा फोलरीवाल, जिसने एक अनवेरिफाइड सोशल मीडिया पोस्ट में हत्या की जिम्मेदारी ली थी, और दलबीरा के खिलाफ जालंधर कमिश्नरेट के डिवीजन 6 पुलिस स्टेशन में बीएनएस और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

पप्पू यादव की गिरफ्तारी केबाद मचा बवाल

पटना से लेकर दिल्ली तक सवाल, विपक्ष के निशाने पर एनडीए सरकार, भाजपा-जदयू ने किया पलटवार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार में सांसद पप्पू यादव की गिरपतारी के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक बवाल मच गया है। जहंा विपक्ष ने एनडीए सरकार पर तीखा हमला किया है वहीं भाजपा व जदयू ने इसका बचाव किया है। बता दें शुक्रवार देर रात बिहार की पूर्णिया सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने 31 साल पुराने मामले में धोखाधड़ी से मकान लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है. इस केस में उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज हो चुकी हैं। जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की सियासत में एक बार फिर तेज राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का मुद्दा बन चुका है। बीजेपी और जेडीयू जहां इस कार्रवाई को कानून और अदालत के आदेश का स्वाभाविक परिणाम बता रहे हैं। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और बदले की कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहा है।

बेटी के लिए न्याय की आवाज बनकर खड़े होने की सजा मिली : राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि पटना के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत के मामले में न्याय की मांग करने के कारण पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया है। एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध है, जिसका उद्देश्य इस मामले से जुड़ी आवाजों को दबाना है। उन्होंने कहा कि इस बेटी के लिए न्याय की आवाज बनकर खड़े रहे मेरे साथी सांसद पप्पू यादव जी। उनकी आज की गिरफ्तारी स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रतिशोध है, जिसका उद्देश्य जवाबदेही की मांग करने वाली हर आवाज को डराना और चुप कराना है। राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त की और सरकार की इस भयावह वास्तविकता पर आंखें मूंद लेने की प्रवृत्ति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह घटना सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं लगती। यह एक भयावह साजिश और खतरनाक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है, जहां और भी बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता में बैठे लोग इस भयावह वास्तविकता से आंखें मूंदकर बैठे हैं। यह राजनीति नहीं है; यह न्याय का सवाल है।
यह बिहार की बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है।

दमन और बदले की राजनीति कर रही नीतीश सरकार : चंद्रशेखर आजाद

नगीना सांसद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर नीतीश सरकार पर हमला किया. उन्होंने लिखा- रात के अंधेरे में पूर्णिया के लोकप्रिय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी, बिहार की एनडीए सरकार की डर, दमन और बदले की राजनीति का खुला ऐलान है। जो सत्ता जनता के सवालों से घबरा जाती है, वही सत्ता आधी रात को जननेताओं को निशाना बनाती है।

अदालत के फैसले का करना चाहिए सम्मान : नीरज

वहीं जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। पप्पू यादव न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर रहे थे, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी.। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे को राजनीति से जोडऩा सही नहीं है।

आम आदमी हो या सांसद कानून सबके लिए बराबर : प्रभाकर

बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि आम आदमी हो या सांसद, कानून सबके लिए बराबर है। जब भी पप्पू यादव के खिलाफ कानून कार्रवाई करता है, वह उसे राजनीति बताकर पीडि़त बनने की कोशिश करते हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार पप्पू यादव शंभू गल्र्स हॉस्टल को ढाल बनाकर बचने का प्रयास कर रहे हैं।

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