उन्नाव में भट्टे की आड़ में बड़ा खेल? किसानों ने खोली कथित अवैध खनन की पोल

उन्नाव के बरहा गांव में भट्टे की परमिशन की आड़ में कथित अवैध खनन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने तय सीमा से बाहर मिट्टी खनन और किसानों की जमीन से जबरन डंपर निकालने का आरोप लगाया है। गांव में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  उन्नाव जिले की पुरवा विधानसभा क्षेत्र का बरहा गांव इन दिनों कथित अवैध खनन को लेकर चर्चा में है। गांव के किसानों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि भट्टे की अनुमति का इस्तेमाल तय नियमों से हटकर बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस सीमा और जिन गाटा नंबरों के लिए परमिशन दी गई थी, उसके बाहर भी लगातार मिट्टी निकाली जा रही है।

गांव में बढ़ते डंपरों की आवाजाही और खेतों के बीच बनाए गए अस्थायी रास्तों ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगहों पर किसानों की जमीन से जबरन डंपर निकाले जा रहे हैं, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं और खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी प्रभावित हो रही है।

किसानों ने जताई फसल और जमीन खराब होने की चिंता

स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे खनन और भारी वाहनों की आवाजाही से उनकी खेती पर सीधा असर पड़ रहा है। खेतों के किनारे कटान बढ़ गया है और कई जगहों पर रास्ते इतने खराब हो चुके हैं कि गांव के लोगों का निकलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, जब उन्होंने इस पूरे मामले का विरोध किया तो उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह है कि गांव में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है और लोगों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है।

प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

गांव के लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भट्टे की परमिशन की आड़ में कथित तौर पर चल रहे इस अवैध खनन पर प्रशासन अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि तय सीमा से बाहर खनन किसकी अनुमति से किया जा रहा है। साथ ही किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है।

गांव में बढ़ रहा असंतोष

बरहा गांव में हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग खुलकर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनका आंदोलन और तेज हो सकता है। अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। देखना होगा कि किसानों के आरोपों के बाद जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और कथित अवैध खनन पर कब तक रोक लगाई जाती है।

रिपोर्ट – रंजन बाजपाई

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