पंजाब में धमाके की गूंज से पूरे देश में सियासी घमासान

  • अनावश्यक दहशत फैला रहे भाजपाई : सौरभ भारद्वाज
  • बोले- भाजपा का पूरा तंत्र इसे बड़े खतरे के रूप में पेश कर रहा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पंजाब में धमाके की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। और इसको लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। भाजपा व आप आमने-सामने आ गए हैं। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में हुए हालिया बम धमाकों को लेकर उनकी टाइमिंग और भाजपा की प्रतिक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश की जा रही है और लोगों में अनावश्यक दहशत फैलाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य पंजाब लंबे समय तक उग्रवाद का दंश झेल चुका है और ऐसे में दहशत फैलाने की राजनीति खतरनाक हो सकती है। आप नेता ने केंद्र सरकार से इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और देश की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर जवाब देने की मांग की। पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब में हुए दोनों धमाके छोटे स्तर के थे और इनमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन भाजपा का पूरा तंत्र इसे बड़े खतरे के रूप में पेश करने में जुट गया। उन्होंने कहा कि दो छोटे धमाकों से जितनी दहशत नहीं फैली, उससे ज्यादा भाजपा अपने ट्रोल और प्रचार के जरिए फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे धमाके अक्सर चुनावी माहौल में ही क्यों होते हैं और इससे किसे राजनीतिक फायदा मिलता है। भारद्वाज ने कहा कि भाजपा नेताओं के बयानों और घटनाओं की टाइमिंग पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब में राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए इस तरह के नैरेटिव को बढ़ावा दे रही है।

दिल्ली धमाके को बीजेपी ने कमतर दिखाने की कोशिश की थी

सौरभ भारद्वाज ने पिछले साल दिल्ली में लाल किला क्षेत्र के पास हुए एक बड़े धमाके का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार ने घटना को कमतर दिखाने की कोशिश की थी और विपक्ष ने उस पर राजनीति नहीं की। इसके विपरीत अब छोटे धमाकों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

विवेक विहार अग्निकांड में पीड़ित को दोषी ठहराकर सरकार छिपा रही है नाकामी

विवेक विहार अग्निकांड को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पालम के बाद अब विवेक विहार मामले में भी सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पीडि़तों को ही दोषी ठहरा रही है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार का तर्क है कि मकान में ऊपर जाने के लिए केवल एक सीढ़ी थी, जिससे लोग बाहर नहीं निकल पाए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यही कारण था, तो बचाव कार्य शुरू होने में करीब 5० मिनट की देरी क्यों हुई? दमकल विभाग की गाडिय़ां देर से क्यों पहुंचीं और मौके पर पहुंचने के बाद भी उपकरण चालू करने में समय क्यों लगा? साथ ही, फायर ब्रिगेड के वाटर कैनन में पानी का दबाव पर्याप्त क्यों नहीं था? उन्होंने कहा कि विवेक विहार जैसी पॉश कॉलोनी में हुई इस घटना में नौ लोगों की दर्दनाक मौत हुई। इसके बावजूद सरकार ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩे की कोशिश की कि घर में लोहे के जाल और ऑटोमैटिक दरवाजों की वजह से लोग फंस गए। भारद्वाज ने इन दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार वहां ऑटोमैटिक ताले जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने पालम अग्निकांड का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी सरकार ने संकरी गलियों और एक सीढ़ी का हवाला देकर पीडि़तों को ही जिम्मेदार ठहराया था। अब वही पैटर्न दोहराया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से सवाल किया कि क्या दिल्ली के अधिकांश घरों में एक ही सीढ़ी नहीं होती, फिर इस आधार पर दोष तय करना कितना उचित है?

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