दिग्विजय सिंह सरकार की पहल से 1998 में अस्तित्व में आई RGPV, राजीव गांधी के नाम पर है संस्थान

MP सरकार ने भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का पुनर्गठन करने का फैसला किया है. आइए, इसी बहाने इतिहास बनने जा रहे RGPV के इतिहास और उसकी विशेषताओं के बारे में जानते हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: MP सरकार ने भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का पुनर्गठन करने का फैसला किया है. इसी बहाने इतिहास बनने जा रहे RGPV के इतिहास और उसकी विशेषताओं के बारे में जानते हैं.

मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का पुनर्गठन करने का फैसला लिया है. इस फैसले के तहत RGPV को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा तो वहीं यूनिवर्सिटी से राजीव गांधी का नाम हटेगा.

MP सरकार के फैसले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक गहमा-गहमी का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस ने यूनिवर्सिटी से राजीव गांधी का नाम हटाने की कोशिश को निंदनीय बताया है. साथ ही इसे पहचान मिटाने की साजिश करार दिया है.

RGPV कब स्थापित की गई. कैसे RGPV के साथ राजीव गांधी का नाम जोड़ा गया. जानते हैं कि RGPV में अभी कितने स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं. जानते हैं कि क्यों RGPV को मध्य प्रदेश का सबसे टेक्निकल एजुकेशन संस्थान माना जाता है. साथ ही जानते हैं कि RGPV को तीन हिस्सों में बांटने की योजना क्या है.

दिग्विजय सिंह सरकार ने 1998 में स्थापित की थी RGPV

भोपाल स्थित RGPV की स्थापना साल 1998 में की गई थी. उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. तो वहीं दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे. दिग्विजय सिंह सरकार ने मध्य प्रदेश विधानसभा अधिनियम 13, 1998 के तहत RGPV की स्थापना की थी.

सम्मान में राजीव गांधी पर रखा गया था यूनिवर्सिटी का नाम

RGPV का नाम राजीव गांधी के नाम पर रखने की जानकारी दिग्विजय सिंह ने ही दी थी. असल में पिछले कुछ समय से RGPV के पुनर्गठन की चर्चा चल रही थी. इस पर संज्ञान लेते हुए 16 मई 2026 को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक पोस्ट किया था. उन्होंने बताया था कि यूनिवर्सिटी का नाम देश में तकनीकी शिक्षा के सूत्रधार राजीव गांधी के नाम पर उनके सम्मान में रखा गया था.

241 एकड़ में फैला है RGPV का कैंपस, अब इस नाम से जाना जाएगा

RGPV का कैंपस में भोपाल में स्थित है, जो भोपाल में लगभग 241.64 एकड़ भूमि के विशाल परिसर में फैला हुआ है. मध्य प्रदेश सरकार के पुनर्गठन फैसले के तहत RGPV को तीन हिस्सों में बांटा जाना है, जिसके तहत तीन अलग यूनिवर्सिटी बनाई जाएगी. RGPV भोपाल कैंपस को पुनर्गठन के तहत मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाएगा.

वहीं उज्जैन और जबलपुर में भी नए विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी है, जिसके तहतउज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया जाएगा.

इंजीनियरिंग के साथ ही फार्मेसी व पॉलिटेक्निक संस्थानों को भी देता था मान्यता

RGPV अपनी स्थापना के साथ ही मध्य प्रदेश का बड़ा टेक्निकल हायर एजुकेशन रहा है. मौजूदा समय में RGPV से 5 प्रौद्योगिकी विभाग, 130 इंजीनियरिंग कॉलेज, 215 फार्मेसी कॉलेज, 54 एमसीए कॉलेज, 2 बी.डिजाइन कॉलेज, 2 आर्किटेक्चर कॉलेज, 85 पॉलिटेक्निक संस्थान और 2 पीएचडी रिसर्च सेंटर संबद्ध हैं.

इसके साथ ही RGPV लगभग 17 यूजी कोर्स संचालित कर रहा है. तो इसके अलावा पॉलिटेक्निक संस्थान कई ट्रेंड में डिप्लोमा प्रोग्राम संचालित कर रहे थे. कुल जमा RGPV से 3.83 लाख विद्यार्थी और 585 संस्थान जुड़े हुए हैं.वहीं RGPV के मैनेजमेंट, फोरेंसिक साइंस, एआई और एमएल, फैशन, इंजीनियरिंग, स्पेस साइंस, सोशल साइंस, नैनो टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशन और फार्मेसी कोर्स को विशेष माना जाता है.

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