लखनऊ में जांबाज आईपीएस के दम से अपराधियों के हौसले पस्त
अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़

- लखनऊ पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा साइबर स्ट्राइक
- 119 से अधिक लोग हिरासत में
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में अपराधियों हौसले बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि पुलिस समय-समय पर कार्रवाई भी करती रहती है। इस बार जांबाज महिला आईपीएस किरन यादव ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क को पकड़ा है। अब साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
गोमतीनगर स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर आधी रात की गई सुनियोजित छापेमारी में 119 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में इस गिरोह के तार कई देशों तक जुड़े होने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस गिरोह के सरगनाओं, विदेशी संपर्कों, बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और हवाला के जरिए हुए लेनदेन की भी गहन पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियों को इस कार्रवाई से कई बड़े खुलासों की उम्मीद है।
विदेशी नागरिकों को झांसा देकर करोड़ों रुपये ठगते थे
बताया जा रहा है कि यह संगठित गिरोह फर्जी कॉल सेंटर के जरिए विदेशों के नागरिकों को तकनीकी सहायता, बैंकिंग और अन्य सेवाओं के नाम पर झांसा देकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसका संचालन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा था।
आरोपियों से पूछताछ
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के संबंध में जल्द ही विस्तृत प्रेस वार्ता कर कई अहम खुलासे किए जाने की संभावना है।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के नेतृत्व में बड़ी कामयाबी
यह पूरी कार्रवाई एडीसीपी क्राइम किरन यादव के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच तथा कई थानों की संयुक्त पुलिस टीम ने देर रात अंजाम दी। पुलिस ने समिट बिल्डिंग को चारों ओर से घेरकर दबिश दी और मौके से बड़ी संख्या में संदिग्धों को हिरासत में लिया। साथ ही कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर, हार्ड डिस्क सहित बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2०21 बैच की आईपीएस अधिकारी और एडीसीपी क्राइम किरन यादव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई को लखनऊ पुलिस की हालिया सबसे बड़ी साइबर अपराध विरोधी कार्रवाई माना जा रहा है।



